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रावी में नारियल व मिंजर विसर्जन के साथ चंबा का ऐतिहासिक मिंजर मेला संपन्न

अखंड चंडी पैलेस से निकाली शोभायात्रा, पारंपरिक कुंजड़ी मल्हार गायन के साथ हुआ समापन

रावी में नारियल व मिंजर विसर्जन के साथ चंबा का ऐतिहासिक मिंजर मेला संपन्न

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चंबा। हिमाचल के चंबा (Chamba) जिला में मनाए जाने वाले ऐतिहासिक मिंजर मेले (Historic Minjar fair) का रविवार को रावी नदी में मिंजर विसर्जन की रस्म के साथ समापन हो गया। समापन समारोह में सदर विधायक पवन नैयर ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। मिंजर मेला कोरोना महामारी के चलते रस्म अदायगी तक ही सीमित रहा। मिंजर विसर्जन से पहले अखंड चंडी पैलेस से शोभायात्रा (Shobha Yatra) निकाली गई। जिसमें भी कुछ ही लोगों को भाग लेने की अनुमति थी। यह शोभायात्रा शहर के मुख्य बाजार से होती हुई मंजरी गार्डन पहुंची। शोभायात्रा का नेतृत्व शहर के प्रमुख देवता भगवान रघुवीर (Lord Raghuveer) ने किया। कोविड-19 (Covid-19) की वजह से शोभायात्रा में सिर्फ परंपराओं से जुड़े लोगों सहित 100 लोग ही शामिल हुए।

यह भी पढ़ें: 25 जुलाई से 1 अगस्त तक होगा मिंजर मेला, मात्र निभाई जाएगी रस्म

 

 

शोभायात्रा के दौरान नगर परिषद के तमाम वार्ड सील रहे, जबकि दोपहर बारह बजे मुख्य बाजार भी बंद कर दिया गया। चार बजे के बाद अखंड चंडी से लेकर भरमौर चौक (Bharmaur Chowk) तक वाहनों की आवाजाही पर रोक रही। शोभायात्रा के मंजरी गार्डन पहुंचने पर लोक गायकों ने पारंपरिक कुंजड़ी मल्हार का गायन किया। मुख्य अतिथि ने मंत्रोच्चारण के बीच रावी नदी में नारियल व मिंजर प्रवाहित कर सुख-समृद्धि की कामना की। उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण (Corona Infection) के चलते लगातार दूसरे साल भी एक सप्ताह तक चलने वाले मिंजर मेले की परंपराओं का ही निर्वहन हुआ। मेले में ना तो दुकानें लगाई गईं और ना ही सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन हुआ।

 

 

मिंजर मेले के बारे में यहां जाने

मिंजर चंबा का सबसे लोकप्रिय मेला है। यह मेला श्रावण महीने के दूसरे रविवार को आयोजित किया जाता है। मेला की घोषणा मिंजर के वितरण से की जाती है जो पुरुषों और महिलाओं के पहने पोशाकों के कुछ हिस्सों पर रेशम की लटकन रूप में समान रूप पहनी जाती है। यह लटकन धान और मक्का की कटाई का प्रतीक है जो वर्ष के इस समय के आसपास उनकी उपस्थिति बनाते हैं। जब ऐतिहासिक चोगान मैदान में मिंजर का झंडा फहराया जाता है तब हफ्ते भर का मेला शुरू होता है। जिसमें खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों (Sports and cultural events) का आयोजन किया जाता है। तीसरे रविवार को उल्लासए रंगीनता और उत्साह अपने अभिविन्यास तक पहुंचते हैं, जब नृत्य करने वाले मंडलियों के साथ रंगीन मिंजर जुलूस, परंपरागत रूप से स्थानीय पोशाकए पुलिस और होम गार्ड बैंड के साथ पारंपरिक ड्रम बॉटर, अपनी मार्च के लिए अखण्ड चंडी पैलेस से पुलिस लाइन के पास नलहोरा स्थल के लिए शुरू होता है। एक विशाल लोगों की भीड़ वहां पहले से इकट्ठा होती है। पहले राजा और अब प्रदेश के सीएम एक नारियल, एक रुपया, एक मौसमी फल और एक मिंजर जो लाल रंग के कपड़े में बंधे होते हैं -लोहान नदी में चढ़ाते हैं। इसके बाद सभी लोग नदी में अपने मिंजरों को चढ़ाते हैं। पारंपरिक कुंजरी-मल्हार को स्थानीय कलाकारों द्वारा गाया जाता है। मिंजर मेला हिमाचल प्रदेश के राज्य मेलों में से एक मेले के रूप में घोषित किया गया है।

 

 

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