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डॉ. राजेश शर्मा ने शिक्षकों की ईमानदारी और अनुशासन को बताया बोर्ड की सबसे बड़ी ताकत
HPBOSE: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की आगामी परीक्षाओं को लेकर बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने प्रदेश के शिक्षक समुदाय पर अपना अटूट विश्वास जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी केवल कागजी नियमों पर नहीं, बल्कि शिक्षकों की कर्तव्यनिष्ठा पर टिकी है। बोर्ड अध्यक्ष ने शिक्षकों को परीक्षा प्रणाली का ‘विश्वसनीय संरक्षक’ बताते हुए उनकी भूमिका को सर्वोपरि करार दिया।
नकल और अनियमितता पर कड़ा प्रहार
डॉ. शर्मा ने सख्त लहजे में कहा कि परीक्षा केंद्रों पर किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों या नकल को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के शिक्षक बोर्ड के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि परीक्षा पूरी गरिमा और अनुशासन के साथ संपन्न हो। बोर्ड का मानना है कि शिक्षकों की पैनी नजर और सतर्कता ही परीक्षा व्यवस्था की पवित्रता को सुरक्षित रख सकती है।
शिक्षण के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का पाठ
बोर्ड अध्यक्ष के अनुसार, शिक्षक न केवल नियमों का पालन करवाएंगे, बल्कि विद्यार्थियों को भी नैतिक मूल्यों के साथ परीक्षा देने के लिए प्रेरित करेंगे। इससे न केवल छात्रों में आत्म-अनुशासन की भावना विकसित होगी, बल्कि समाज का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षकों के सहयोग से ही एक स्वच्छ, निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली का सपना साकार हो सकता है।
मजबूत होगी बोर्ड की साख
डॉ. शर्मा ने अंत में दोहराया कि शिक्षकों की सकारात्मक भूमिका से न केवल परीक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि इससे हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की साख भी नई ऊंचाइयों को छुएगी। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपनी पूरी निष्ठा के साथ इस जिम्मेदारी का निर्वहन करें ताकि प्रदेश में शिक्षा का स्तर और परीक्षा की गुणवत्ता मिसाल बन सके।
अमित महाजन
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