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MC Shimla Election: पहली बार इस पार्टी की मौजूदगी बिलकुल फीकी
MC Shimla Election: नगर निगम शिमला बनने के बाद ऐसा पहली बार हो रहा कि नगर निगम चुनाव (MC Shimla Election)में माकपा की मौजूदगी बिलकुल फीकी दिख रही है। 1986 में शिमला नगर निगम बनने के बाद शहर के लोगों को ये आभास पहली बार हो रहा है कि शहर में माकपा का चुनाव बिलकुल हलके से लड़ रही है। इस चुनाव के लिए नामांकन वापस लेने के बाद अब माकपा के चार ही प्रत्याशी मैदान में है। इस बार माकपा ने इतने कम वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारे हैं उतने तो तब भी नहीं थे जब नगर निगम बना था।
ऐसे में पार्टी के समर्थक भी इस फैसले से हैरान है। लेकिन अगर तह में जाने की कोशिश करें तो इसमें एक बात निकल कर सामने आती है वह यह कि पिछले 2 विधानसभा चुनावों में पार्टीं का जनाधार शिमला शहर में कम हुआ है। ऐसा नहीं कि अभी शहर में पार्टी का कॉडर कम हो गया है लेकिन कुछ बरसों से पार्टी की शहर के जमीनी मसलों से संघर्ष की पकड़ कम होती गई। पिछले दोनों ही विधानसभा चुनावों में माकपा के प्रत्याशी अपनी जमानतें भी नहीं बचा पाए थे।
शिमला शहर से पार्टी के एक विधायक तो चुनाव जीत ही चुके है, साथ ही प्रत्यक्ष चुनाव से 2012 में कांग्रेस और बीजेपी की मजबूत पैठ के बीच भी जनता ने माकपा के मेयर और डिप्टी मेयर भी बनवा दिए थे। लेकिन इस चुनाव में पार्टी में बेहद हलके तरीके से चुनाव मैदान में है, जिससे समर्थकों में भी निराशा है। हालांकि पार्टी का मानना है कि पार्टी को दोबारा से शहर में खड़ा किया जा रहा है।
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