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कांग्रेस के भीतरी ‘आक्रोश’ पर खर्च होती नजर आई जन आक्रोश रैली, पढ़ें यह विश्लेषण

हिमाचल कांग्रेस प्रभारी को मंच से पढ़ाना पड़ा एकजुटता का पाठ

कांग्रेस के भीतरी ‘आक्रोश’ पर खर्च होती नजर आई जन आक्रोश रैली, पढ़ें यह विश्लेषण

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हिमाचल अभी अभी डेस्क। शिमला में बीते रोज वैसे तो हिमाचल कांग्रेस (Himachal Congress) ने बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर जन आक्रोश रैली (Jan Aakrosh Rally) आयोजित की, लेकिन इस रैली में कांग्रेस के भीतर के ‘आक्रोश’ जरूर बड़े नेताओं के बयानों में झलका। दरअसल हिमाचल कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला (Rajiv Shukla) और छह बार सीएम रह चुके वीरभद्र सिंह (Virbhadra Singh) इस जन आक्रोश रैली में भी कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुटता का पाठ पढ़ाते हुए नजर आए। ऐसे में यह रैली भी कहीं ना कहीं अंत में बीजेपी (BJP) सरकार को कोसने की बजाय कांग्रेस के अपने नेताओं को समझाने में ही खर्च होती नजर आई। ऐसे में कांग्रेस के बीच जारी बड़ी अंतर्कलहों के हालिया उदाहरण को समझते हैं कि कांग्रेस के भीतर आखिर चल क्या रहा है।


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मंडी में सुक्खू के कार्यक्रम से जिला अध्यक्ष ही नदारद

हाल ही में कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू (Sukhwinder Singh Sukhu) मंडी जिला पहुंचे थे। यहां जिला कांग्रेस कार्यकारिणी ने उनके लिए स्वागत कार्यक्रम रखा। गौर करने वाली बात यह रही कि कार्यक्रम में ना तो वर्तमान जिला कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी (Former Minister Prakash Chaudhary) थे और ना ही पूर्व हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर। हालांकि बताया कि कौल सिंह जिला से बाहर थे, लेकिन प्रकाश चौधरी का अखबारों में बयान प्रकाशित हुआ कि उन्हें कार्यक्रम का न्योता ही नहीं मिला था। वह भी उन हालातों में जब मंडी जंबो कार्यकारिणी बनाई गई हो। मंडी कांग्रेस में 171 सदस्यीय कार्यकारिणी बनाई गई है, जबकि प्रदेश के सबसे बड़ा जिला में भी 171 सदस्यीय कार्यकारिणी ही है। ऐसे में जिस जिला में बीजेपी के पास सीएम का चेहरा हो उस जिला में इस तरह कांग्रेस की गुटबाजी उन्हीं के लिए घातक साबित होगी।

 

 

विधानसभा प्रकरण में नेताओं के बयानों में अंतर

विधानसभा में बजट सत्र (Budget Session) के पहले दिन राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के अभिभाषण के बाद जो कुछ हुआ वो जगजाहिर है। इस प्रकरण के बाद कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री सहित पांच कांग्रेस नेताओं को सदन से निलंबित कर दिया गया। इस दौरान मुकेश अग्निहोत्री सहित निलंबित विधायक सदन के बाहर धरना दे रहे थे, जबकि दूसरे विधायक विधानसभा के अंदर जाने के बाद वॉकआउट करते रहते थे। इस बीच रोज मुकेश अग्निहोत्री और दूसरे कांग्रेस के वरिष्ठ विधायकों की स्टेटमेंट में भारी अंतर देखने को मिल रहा था। इस दौरान संगठन और विधायकों के बीच तालमेल की कमी भी साफ झलक रही थी। पूरे प्रकरण में धरना देने के लिए खुद पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह को आना पड़ा था।

सुक्खू गुट और वीरभद्र गुट के बीच कुलदीप सिंह राठौर

नेता प्रतिपक्ष का पद मुकेश अग्निहोत्री को मिला है। सभी जानते हैं मुकेश पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के खासमखास हैं। मुकेश अग्निहोत्री को लीडर ऑफ ऑपोजिशन से हटाने को लेकर सवाल होने लगे तो वीरभद्र सिंह ने साफ कर दिया कि वो अच्छा काम कर रहे हैं। इसके बाद बीते दिन हुई जन आक्रोश रैली में खुद हिमाचल कांग्रेस के प्रभारी राजीव शुक्ला को कहना पड़ा कि मुकेश अग्हिनोत्री असेंबली में कांग्रेस के टाइगर हैं। दरअसल, पिछले चुनावों से लेकर अभी तक भी सुक्खू गुट और वीरभद्र सिंह के गुट से आने वाले लोग आमने-सामने ही रहते हैं।

इसका उदाहरण कई बार वीरभद्र सिंह की लंच डिप्लोमेसी में भी देखने को मिल चुका है। ये बात जगजाहिर है कि सुक्खू, बाली और कौल सिंह ठाकुर की वीरभद्र गुट से हमेशा दूरी ही रहती है, जबकि तीनों ही बड़े नेता हैं। इन सभी नेताओं के बीच कहीं ना कहीं मौजूदा हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर फंसते से नजर आते हैं। इसी का उदाहरण है कि मंडी कांग्रेस में हिमाचल के सबसे बड़े जिला की कार्यकारिणी के बराबर सदस्य हैं। कुलदीप सिंह राठौर कह चुके हैं जो साथ में रहेगा वही आगे जाएगा जो छूट जाएगा वो पीछे रह जाएगा।

निगम चुनाव अंतर्कलह की परीक्षा

वैसे तो हिमाचल कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला ने अभी से 2022 के हिमाचल विधानसभा चुनाव की तैयारियां करने के लिए कहा है, लेकिन कांग्रेस को अपनी अंतर्कलह से पार पाने का निगम चुनाव ही सबसे बड़ा मौका है। निगम चुनावों में कांग्रेस की गुटबाजी और ज्यादा खुलकर सामने आ सकती है। इसका एक उदाहरण आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि मंडी के दिग्गज कौल सिंह ठाकुर की ड्यूटी पालमपुर में लगाई गई है, जबकि कांगड़ा के दिग्गज जीएस बाली की ड्यूटी मंडी लगाई गई है। इसके अलावा धर्मशाला नगर निगम में तो सुधीर शर्मा का नाम ही गायब है। यही नहीं, धर्मशाला निगम चुनाव में वार्ड पर्यवेक्षकों की सूची में बाद पांच नाम और जोड़ने पड़े थे।

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