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डॉ. राजेश बोले, कांग्रेस व्यवस्था परिवर्तन के लिए लड़ेगी चुनाव

मोदी सरकार अराजकता का माहौल कर रही तैयार

डॉ. राजेश बोले, कांग्रेस व्यवस्था परिवर्तन के लिए लड़ेगी चुनाव

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शिमला। हिमाचल कांग्रेस के कोषाध्यक्ष डॉ राजेश शर्मा (Dr Rajesh Sharma) ने कहा है कि केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार महंगाई रोकने में नाकाम रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने कुछ राजनीतिक उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए उज्जवला योजना चलाई। लोगों को पहले निशुल्क चूल्हे और सिलेंडर दिए और अब 1150 रुपए में सिलेंडर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के समय में जब सिलेंडर 400 रुपए में था तो यही बीजेपी (BJP) हाय-तौबा मचाती थीए मगर आज 1150 रुपए सिलेंडर लोगों को देने पर वह खामोश है। उन्होंने कहा कि महंगाई से राहत देने के लिए पूर्व की वीरभद्र सरकार ने लोगों को राशन डिपुओं के माध्यम से सस्ती दालें और तेल उपलब्ध करवाया था। यह लोगों को राहत थी। मगर मोदी सरकार रोजमर्रा की चीजों के लगातार दाम बढ़ाकर लोगों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। डॉ राजेश ने कहा कि जब (Congress) कांग्रेस सरकार सत्ता में आएगी तो वह लोगों को राहत देने के लिए हर संभव कदम उठाएगी। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस हिमाचल में चुनाव सता के लिए नहीं बल्कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए जीतेगी। किसानों को कर्ज मुक्त बनाएंगे और महंगाई से राहत देने के लिए सरकार कदम उठाएगी।

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डॉ राजेश शर्मा ने केंद्र की मोदी सरकार (Modi Govt) को तानाशाह सरकार करार देते हुए कहा कि मोदी सरकार विपक्ष के नेताओं को निशाना बना रही है ताकि उसकी जन विरोधी नीतियों को कोई विरोध ना करे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों और फैसलों को खुलकर विरोध कर रहे हैं। इसलिए उनको ईडी के माध्यम से प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ईडी का (ED) इस्तेमाल चुनाव जीतने के मकसद से कर रही है। डॉ राजेश ने कहा कि अगर इस तरीके से ही चुनाव जीतने हैं तो चुनाव आयोग को खत्म कर ईडी में बदल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कि पीएम नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रियों ने हिमाचल की जनता से झूठे वादे किए। मोदी ने ऊना तलवाड़ा रेलवे लाइन तीन साल में पूरा करने का वादा किया था। लेकिन अब तक यह पूरी नहीं हुई। नौ साल पहले यूपीए सरकार ने मंडी में आईआईटी और देहरा में सेंट्रल दी थी ,लेकिन आज तक सेंट्रल यूनिवर्सिटी को लेकर कोई कदम नहीं उठाए गए। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पठानकोट -मंडी-जोगिंदरनगर फोरलेन और शिमला मटौर फोरलेन को तीन साल में पूरा करने की घोषणा चुनावों के समय की थी, लेकिन इनकी हालात क्या है यह सब जानते हैं।

डॉ राजेश ने कहा है कि पीएम मोदी ने पांच साल पहले किसानों की आय दोगुनी करने का जो वादा किया था वो जुमला साबित हुआ है। किसान बागवान आज सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं। इन दिनों हिमाचल में सेब का सीजन चरम पर है, इसके बावजूद बागवान मजबूरन अपना काम छोड़कर राज्य सचिवालय का घेराव करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि बागवानों को मजबूरन सड़कों पर उतरकर अपनी फसल को बचाने के लिए उतरना पड़ रहा है। इस आंदोलन में महिलाएं भी थीं जो कि कह रही थी कि हमने अपने बागीचों को बच्चों की तरह पाला है, लेकिन यह सरकार उनको उजाड़ने पर उतारू है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार हिमाचल में सेब को खत्म करने पर तुली हुई है। आज तक सेब और अन्य फलों के कार्टन पर जीएसटी नहीं था, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने इस पर 18 फीसदी जीएसटी लगा दिया। अब जयराम सरकार छह फीसदी जीएसटी कम करने की बात कर रही है। सरकार को चाहिए था कि इस पूरे जीएसटी (GST) को ही खत्म कर देती।

राजेश शर्मा ने कहा कि बीजेपी सरकार ने सेब की दवाइयों पर सब्सिडी खत्म कर दी। इससे सेब उत्पादन की लागत कई गुणा बढ़ गई है, जबकि इसके अनुपात में उनको इसके दाम नहीं मिल रहे। उन्होंने कहा कि सरकार के नकारात्मक रवैये से हिमाचल में 4000 करोड़ से अधिक की सेब की आर्थिकी पर संकट खड़ा हो गया है। हिमाचल में सेब से सीधी तौर पर एक लाख युवाओं को रोजगार मिला हुआ है जबकि करीब 1.50 लाख परिवार इससे जुड़े हुए हैं। अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। यही नहीं सेब से हिमाचल की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है। मगर बीजेपी सरकार सेब की आर्थिकी को तहस नहस कर रही है। डॉ राजेश ने कहा कि हिमाचल में जयराम ठाकुर (Jai Ram Thakur) में प्रशासनिक क्षमता का अभाव है और वे नाम मात्र के सीएम है। उन्होंने कहा कि जयराम सरकार से आज हर वर्ग त्रस्त है। किसान, बागवान, कर्मचारी सभी वर्ग इस सरकार से पूरी तरह से परेशान है। उन्होंने कहा कि जिस कर्मचारी वर्ग का प्रदेश के विकास में अहम योगदान है और जिसके दम पर हिमाचल को देश में कई पुरस्कार मिले हैं, उनको ही इस सरकार ने हाशिये पर धकेल दिया है। कर्मचारी आंदोलन करने को मजबूर है। उन्होंने सीएम जयराम ठाकुर को नसीहत दी कि वे अहम में ना रहें, जिन कर्मचारियों ने आपको सता में पहुंचाया है वे आपको सता से बाहर करने की भी ताकत रखते हैं। सीएम जयराम ठाकुर को अहम त्याग कर अभी कर्मचारियों और अन्य वर्गों की मांगों को मान लेना चाहिए।

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