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कदमों ने साथ छोड़ा तो हौसले की कलम से लिख दी जिंदगी की खूबसूरत स्क्रिप्ट

25 साल से किक्की सिंह व्हील चेयर पर हैं रांची की स्वाति सिंह उर्फ किक्की सिंह

कदमों ने साथ छोड़ा तो हौसले की कलम से लिख दी जिंदगी की खूबसूरत स्क्रिप्ट

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रांची की स्वाति सिंह उर्फ किक्की सिंह जन्म लेते ही सेरेब्रल पाल्सी का शिकार हो गईं थीं। उनके पिता एयरफोर्स में ऑफिसर थे। बड़े अस्पताल में लंबा इलाज चला, लेकिन डॉक्टर ने आखिरकार कह दिया कि वह कभी अपने पांवों पर नहीं चल सकेंगी। पिछले 25 साल से किक्की सिंह व्हील चेयर पर हैं, लेकिन उनकी उपलब्धियों की यात्रा अनवरत जारी है। उनका एक उपन्यास सुपर सेलर रहा है। उनकी कविता संग्रह की एक किताब को शानदार रिस्पांस मिला है। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी उनकी प्रतिभा को सराहा है। शानदार लेखन के लिए उन्हें दो दर्जन से भी ज्यादा पुरस्कारों से नवाजा गया है।

 

सेरेब्रल पाल्सी बीमारी के साथ आई विवशताओं ने किक्की सिंह का कदम-कदम पर रास्ता रोकने की कोशिश की, पर उनका जिजीविषा और हौसला इतना बड़ा रहा कि वह आगे बढ़ती रहीं। उन्हें स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए भी उनके माता-पिता को मशक्कत करनी पड़ी। उनके पिता का तबादला गाजियाबाद हो गया था। उसके पिता हिंडन एयरफोर्स स्कूल में बेटी का एडमिशन कराने पहुंचे तो स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन इस बात को लेकर आशंकित था कि सामान्य बच्चों के साथ उसकी पढ़ाई कैसे हो पायेगी। इससे पहले स्कूल में एक अन्य दिव्यांग छात्रा कई बार छात्रों और टीचर को चोट पहुंचा चुकी थी। पिता के आग्रह पर स्कूल में स्पेशल मीटिंग हुई। किक्की सिंह का आईक्यू परखा गया, जिसमें सफल होने पर उन्हें एडमिशन मिला। प्रारंभिक कक्षाओं में उन्हें कई विषयों में शत-प्रतिशत नंबर प्राप्त होते रहे। कक्षा छह तक पढ़ाई की पढ़ाई इसी स्कूल में हुई। वह चौथी कक्षा से ही कहानी, कविताएं लिखने लगीं। रचनाएं अखबारों और पत्रिकाओं में छपने लगीं तो कलम से उनकी दोस्ती और गहरी हो गयी। 2007 में उनका परिवार रांची शिफ्ट हो गया। आगे की पढ़ाई यहीं हुई। 2018 में उन्होंने ग्रैजुएशन और 2020 में पॉलटिकल साइंस से एमए किया।

ग्रेजुएशन के दौरान ही किक्की सिंह ने पहला उपन्यास लिखा। ‘शादी का सपना’ नामक इस उपन्यास को डायमंड बुक्स ने छापा। अमेजन पर यह किताब सुपर सेलर रही। इसके पहले एडिशन की ही तीन हजार से ज्यादा प्रतियां बिकीं। झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसका विमोचन किया था। भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी इस उपन्यास के लिए उन्हें सराहा और सम्मानित किया। किक्की सिंह को राष्ट्रपति के कहे शब्द आज भी याद हैं। वह बताती हैं कि राष्ट्रपति ने उनसे कहा था, ‘जब मैं आप जैसी बेटियों को आगे बढ़ता देखता हूं तो दिल से खुशी होती है।’ किक्की सिंह उन क्षणों को नहीं भूलतीं, जब कई लोगों ने उनकी बेबसी को लेकर तंज कसा और कमजोरी का अहसास दिलाया। वह कहती हैं कि मैंने खुद को भीतर से मजबूत किया और मेरा इरादा एक ऐसे स्टार्टअप का है, जहां समाज के उपेक्षित तबके के लोग काम करते हुए अपने सपनों और उम्मीदों को उड़ान दे सकें।

पिछले साल उनका कविता संग्रह ‘तेरा नाम का’ प्रकाशित हुआ है, जिसका विमोचन शरद पवार ने किया था। यह किताब भी खूब सराही गई है। तीसरी किताब पर काम चल रहा है। किक्की बताती हैं कि इस किताब में वह बेजुबान जानवरों की संवेदनाओं को सामने लाना चाहती हैं। वह झारखंड की तत्कालीन गर्वनर द्रौपदी मुर्मू, बॉलीवुड के गीतकार संतोष आनंदसहित हस्तियों के हाथों सम्मानित हो चुकी हैं। आईएमए, रांची प्रेस क्लब सहित कई साहित्यिक संस्थाओं ने भी उन्हें सम्मान से नवाजा है। वह अपना एक यू-ट्यूब चैनल भी चलाती हैं। किक्की कहती हैं,’व्हील चेयर पर टिके रहकर आगे की चुनौतियों का मुझे भरपूर अहसास है। ऊपर वाले ने मेरी जिंदगी की जो स्क्रिप्ट लिखी, उसे भूलकर मैं जिंदगी के लिए एक यादगार और खूबसूरत स्क्रिप्ट लिखना चाहती हूं।’

–आईएएनएस

 

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