Covid-19 Update

2, 84, 952
मामले (हिमाचल)
2, 80, 739
मरीज ठीक हुए
4117*
मौत
43,125,370
मामले (भारत)
523,236,943
मामले (दुनिया)

ये थी कश्मीर की आखिरी हिंदू रानी, पिता के हत्यारे से रचाई थी शादी

जनता के हितों के लिए काम करती थी कोटा रानी

ये थी कश्मीर की आखिरी हिंदू रानी, पिता के हत्यारे से रचाई थी शादी

- Advertisement -

पश्चिमी देशों में साल 2022 में भी महिलाओं के शीर्ष पद पर आसीन होने या कमान संभालने पर कई महीनों तक वाहवाही दी जाती है, लेकिन भारत में शुरुआत से ही महिलाओं के सत्ता में रहने और कई क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाने का चलन रहा है। कश्मीर (Kashmir) ने भी कभी ऐसी ही नायाब महिला शासक के दौर को देखा है।

यह भी पढ़ें- 70 साल पुराने वेडिंग गाउन में दादा-दादी ने मनाई 70वीं सालगिरह, इतना बड़ा है इनका परिवार

अनुच्छेद 370 (Article 370) के निरस्त किए जाने के बाद से कश्मीर की बदलती राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक तस्वीर उस दौर की याद दिलाती है, जब यहां धार्मिक और सांस्कृतिक सहिष्णुता थी, जब यहां की वादियों में असीम शांति महसूस होती थी और जब संत, पीर और फकीर कला जीवन के मायने बताते थे। तब का संपन्नता भरा दौर उस वक्त के शासक के अपनी जनता के प्रति लगाव का परिणाम था।

जनता के हित में किए काम

कश्मीर ने जिस हिंदू रानी के नेतृत्व में विकोस किया ओर कदम बढ़ाया, वह थीं कोटा रानी। कोटा रानी का व्यक्तित्व लोगों को चमत्कृत करने वाला था और उन्होंने अपने निजी भावनाओं को होम करके जनता के हितों को सर्वोपरि रखा, जिसके कारण वहां की जनता के दिल में उनकी अमिट छाप छोड़ी।

कश्मीर के राजा की थी बेटी

कोटा रानी के पिता रामचंद्र कश्मीर के राजा सुहादेव के प्रधानमंत्री और सेनापति थे। इसी दौरान लद्दाख का एक राजकुमार रिन्शेन राजगद्दी की लड़ाई में अपने चाचा से हारकर सुहादेव के पास आया। सुहादेव के दरबार में उसे मंत्री का पद मिला और उसकी दोस्ती यहां शाहमीर से हुई। मंगोली आक्रांता जुल्जू या दुलाशा ने जब कश्मीर पर हमला किया और सुहादेव को हरा दिया तो सुहादेव भागकर तिब्बत चला गया। दुलाशा के लिए लेकिन कश्मीर महंगा सौदा साबित हो रहा था। यहां की जलवायु, भूगोल और सेना को यहां तैनात करने का खर्च दुलाशा को अधिक लगने लगा तो वह कश्मीर छोड़कर चला गया।

पिता के हत्यारे से की शादी

दुलाशा के चले जाने के बाद रामचंद्र ने राजगद्दी संभाली और रिन्शेन को प्रशासक नियुक्त किया। रिन्शेन ने लेकिन रामचंद्र की हत्या कर दी और सत्ता हथिया ली। रिन्शेन बहुत ही चालाक और कूटनीतिक व्यक्ति था। उसने रामचंद्र के बेटे रावणचंद्र को अपना मुख्य सलाहकार नियुक्त किया और उसे लद्दाख और लार की जागीर दे दी। उसने रामचंद्र की बेटी कोटा रानी से शादी कर ली। कोटा रानी ने कश्मीर की जनता के हित में अपने पिता के हत्यारे को पति के रूप में स्वीकार किया।

जनता के दिलों में बनाई जगह

सन् 1323 में रिन्शेन की मौत हो गई, तो कोटा रानी से उसके भाई उदयन देव से शादी कर ली। उदयन देव से शादी कर कोटा रानी ही सत्ता की बागडोर संभाले हुई थीं। उस वक्त मंगोल तुर्क आक्रमणकारी अशला ने कश्मीर पर आक्रमण किया तो उदयन देव तिब्बत भाग गया, लेकिन कोटा रानी मैदान में डटी रहीं। उन्होंने दुश्मन को पीछे ढकेला और अशला को मार गिराया। इस घटना के बाद वह अपने जनता के दिलों में घर कर गईं।

यह भी पढ़ें- अनोखा पेड़! काटने पर निकलता है खून, ठीक होती हैं कई बीमारियां

इतने साल संभाली सत्ता

कोटा रानी ने 15 साल तक सत्ता की कमान संभाली और उनके पहले पति रिन्शेन के दोस्त और वजीर शाहमीर ने हमेशा उनका साथ दिया। शाहमीर के साथ कोटा रानी ने कश्मीर को स्थिरता दी और राज्य में शासन व्यवस्था लागू की। शाहमीर भी बाहर से आया था। कुछ का मानना है कि शाहमीर तुर्क था तो कुछ का कहना है कि वह पांडवों में महान धनुर्धर रहे अर्जुन का वंशज था। उसे लोहारा वंश के कश्मीर राजा साहदेव ने एक गांव तोहफे में दिया था।

इन्होंने की मदद

कोटा रानी के शासनकाल में कई बाहरी लोगों ने राज्य हथियाने की कोशिश की, लेकिन मंत्रियों की वफादारी और अपनी समझदारी व कूटनीतिक जानकारी की बदौलत रानी ने हर कोशिश को नाकाम कर दिया। उन्होंने कश्मीर को सिर्फ बाहरी हमलों से नहीं बचाया बल्कि वे राज्य में आंतरिक खुशहाली लाने के लिए भी प्रयासरत रहीं।

इतिहासकार ने की प्रशंसा

कश्मीर के इतिहासकार जोनराजा कोटा रानी की प्रशंसा अपनी कविता में करते हुए कहते हैं कि जिस तरह से नहरें खेतों को पोषण देती हैं, उस तरह से ही रानी संपत्ति न्योछावर कर अपने लोगों को खुशहाली देती हैं। वह राज्य के लिए बिल्कुल वैसी हैं, जैसे नीलकमल के लिए चांद होता है। वह दुश्मनों के लिए बिल्कुल वैसी हैं, जैसे सफेद कमल के लिए सूरज होता है।

इस नहर का करवाया निर्माण

मंगोल तुर्क आक्रमणकारी को मार गिराने के बाद कोटा रानी ने भट्ट भीक्षणा को अपना प्रधानमंत्री नियुक्त किया और अपनी जनता को संरक्षण देती रहीं। उनका हर कदम बस कश्मीर की जनता के हित में उठा। उन्होंने इसी ख्याल के साथ कुटकोल नहर का निर्माण कराया। यह नहर श्रीनगर शहर को बाढ़ से बचाने के लिए बनाई गई थी। झेलम नदी का पानी इस नहर के जरिए श्रीनगर के प्रवेश के पास से गुजरता था और फिर शहर के इर्द-गिर्द होता हुआ नदी में मिल जाता था।

कोटा रानी ने की आत्महत्या

कोटा रानी ने जब भट्ट भीक्षणा को प्रधानमंत्री नियुक्त किया तो शाहमीर कुपित हो गया। उसने धोखे से भट्ट की हत्या कर दी और कोटा रानी के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। कोटा रानी ने 1339 में आत्महत्या कर ली और अपनी आंतें शाहमीर को तोहफे के रूप में भेज दीं। कोटा रानी की आत्महत्या के बाद शाहमीर ही सुल्तान शम्सउद्दीन के नाम से कश्मीर का पहला मुस्लिम शासक बना।

मौलिक अधिकारों से वंचित रहीं महिलाएं

कोटा रानी के जाने के साथ ही समाज में महिलाओं को पद छीनता गया। यहां तक कि जैनुल आबदीन के शासनकाल में भी महिलाओं की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और वे मौलिक अधिकारों से भी वंचित रहीं।

ऐसी थी कोटा रानी की छवि

कोटा रानी की कहानी भले ही हर पग पर संघर्ष और युद्ध को बताती है, लेकिन वह अपने निजी बलिदानों के कारण लोगों के दिल में एक देवी की तरह रहीं। उनकी बहादुरी, बुद्धिमता और कूटनीति ने एक मानक स्थापित किया। कोटा रानी की किस्मत में भले ही चैन का एक भी पल नहीं था, लेकिन वह एक मां की तरह लोगों को छत्रछाया देती रहीं।

–आईएएनएस

हिमाचल और देश-दुनिया के ताजा अपडेट के लिए like करे हिमाचल अभी अभी का facebook page

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App


विशेष \ लाइफ मंत्रा


Himachal Abhi Abhi E-Paper



सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है