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करुणामूलक आश्रित उपचुनाव में वोट से करेंगे चोट, कहा- 4500 परिवार 10 साल झूल रहे हैं
शिमला। हिमाचल (Himachal) में उपचुनाव (By Election) को लेकर प्रचार का आज आखिरी दिन है। प्रचार प्रसार के दौरान नेताओं ने अपने भाषणों में कई लोकलुभावन बातें कहीं है। इन सबके बीच करुणामूलक आश्रित सत्ताधारी पार्टी से नाराज हो गए हैं। करुणामूलक आश्रितों का कहना है कि वे 90 दिन से क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। लेकिन सरकार ने उनकी कोई सुध नहीं ली है। मीडिया से मुखातिब होते हुए करूणामूलक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि करूणामूलक आधार पर सरकारी नौकरी देने के मामले पर सरकार कोई अंतिम फैसला नहीं ले पाई है। जबकि, सरकार के पास विभिन्न विभागों में 4500 से ज्यादा मामले लंबित हैं।
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अजय कुमार ने बताया कि प्रभावित परिवार करीब 20 साल से नौकरी का इंतजार कर रहें हैं। उन्होंने बताया कि कई विभागों में कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने के बाद आश्रित परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। हिमाचल में इस तरह के सैंकड़ों मामले हैं। 15 से 20 साल बीत जाने के बाद भी आश्रित परिवार को नौकरी नहीं मिल पाई है। अजय ने कहा कि करुणामूलक आश्रित प्रतिदिन दफ्तरों के चक्कर लगाते हैं। मगर उन्हें आश्वासन के सिवाए कुछ नहीं मिलता है। करुणामूलक आश्रितों ने कहा कि उपचुनाव से पहले सरकार चुनाव आयोग से अनुमति लेकर वन टाइम सेटलमेंट नोटिफिकेशन जारी करें। नहीं तो करुणामूलक परिवार 30 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में वोट से चोट करेंगे।
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