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बिना बिजली दिन में जगमगाएगा अंधेरा कमरा: प्लास्टिक की बोतल और पानी से बनाएं ‘मोजर लैंप’, जानें कैसे काम करती है यह तकनीक
Moser Lamp: यदि आपके घर के किसी कमरे में दिन के समय भी अंधेरा रहता है और आपको लाइट जलानी पड़ती है, तो एक साधारण प्लास्टिक की बोतल इसका बेहद सस्ता और अनोखा समाधान बन सकती है। दिन के समय भी अगर घर का कोई कमरा अंधेरा रहता है और वहां बल्ब जलाना पड़ता है, तो एक साधारण प्लास्टिक की बोतल इसका दिलचस्प समाधान बन सकती है.]. पानी से भरी एक पारदर्शी बोतल को छत में लगाकर सूरज की रोशनी को पूरे कमरे में फैलाया जा सकता है । पानी से भरी पारदर्शी बोतल को छत में लगाकर सूरज की रोशनी को कमरे के भीतर फैलाया जा सकता है। इस कम लागत वाली तकनीक को ‘मोजर लैंप’ या ‘लो-कॉस्ट डेलाइटिंग सॉल्यूशन’ कहा जाता है। इस तकनीक को आमतौर पर ‘मोजर लैंप’ कहा जाता है। इसी वजह सेइसे एक तरह का low-cost daylighting solution माना जाता है।
ब्राजील से शुरू हुआ यह अनोखा विचार
इस तकनीक का आविष्कार ब्राजील के मैकेनिक अल्फ्रेडो मोजर ने बिजली की समस्या से निपटने के लिए किया था । इसका विचार ब्राजील के मैकेनिक अल्फ्रेडो मोजर से जुड़ा है। जिन्होंने ब्राजील में बिजली से जुड़ी समस्याओं के बीच इस सरल विचार को विकसित किया था। बाद में ‘लीटर ऑफ लाइट’ (Liter of Light) जैसे वैश्विक अभियानों ने इस विचार को दुनिया भर के कम आय वाले समुदायों तक पहुंचाया। बाद में Liter of Light जैसे अभियानों ने इसी तरह की बोतल आधारित रोशनी को कम आय वाले समुदायों तक पहुंचाने में मदद की। बिना किसी महंगे सोलर पैनल या जटिल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के, यह तकनीक उन घरों के लिए वरदान साबित हुई जहां खिड़कियां कम होती हैं। इसकी खासियत यह थी कि इसके लिए महंगे सोलर पैनल या जटिल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जरूरत नहीं पड़ती। खासकर ऐसे घरों में, जहां खिड़कियां कम हों या दिन में भी पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी न पहुंचती हो, वहां इसका इस्तेमाल किया गया।
कैसे काम करता है ‘मोजर लैंप’?
संरचना: एक पारदर्शी PET प्लास्टिक की बोतल में साफ पानी भरा जाता है।
फिटिंग: बोतल का आधा हिस्सा छत के बाहर (धूप में) और आधा हिस्सा कमरे के भीतर रखा जाता है।
रोशनी का फैलाव: जब सूरज की किरणें बोतल के पानी से गुजरती हैं, तो पानी प्रकाश को रिफ्रैक्ट (रिफ्रैक्शन) करके चारों दिशाओं में फैला देता है। जब सूरज की किरणें बोतल के पानी से होकर गुजरती हैं, तो पानी प्रकाश को अलग-अलग दिशाओं में फैलाने में मदद करता है। इससे कमरे में दिन के समय बल्ब जैसी तेज प्राकृतिक रोशनी मिलती है । पानी और पारदर्शी बोतल मिलकर प्रकाश को बिखेरते हैं, जिससे कमरे का एक हिस्सा दिन में काफी उजला दिखाई दे सकता है।
मुख्य फायदे और सावधानियां
कम लागत: घर में पड़ी बेकार प्लास्टिक बोतल का रीसाइक्लिंग कर इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी इसकी कम लागत है। घर में बेकार पड़ी पारदर्शी PET बोतल को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
बिजली की बचत: दिन में बल्ब न जलाने से बिजली के बिल में कटौती होती है। दिन के समय कमरे में प्राकृतिक रोशनी पहुंचने से कुछ परिस्थितियों में बल्ब जलाने की जरूरत भी कम हो सकती है।
छत की वाटरप्रूफिंग: बोतल लगाते समय छत में छेद करना पड़ता है, इसलिए बारिश के पानी को रोकने के लिए सिलिकॉन या सीलेंट से लीक-प्रूफिंग करना बेहद जरूरी है। छत में छेद करना संरचना को प्रभावित कर सकता है। यदि सीलिंग ठीक से न की जाए, तो बारिश का पानी अंदर आने का खतरा भी रहता है। बोतल के आसपास का हिस्सा पूरी तरह वाटरप्रूफ होना चाहिए।
सफाई: पानी में काई या शैवाल न जमे, इसके लिए समय-समय पर बोतल की देखभाल और साफ पानी का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि रोशनी कम न हो। पानी को समय-समय पर साफ रखना भी जरूरी है, क्योंकि गंदगी या शैवाल बढ़ने से रोशनी कम हो सकती है।
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