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रिटायर्ड फौजी ने बदली रीत, पारंपरिक खेती छोड़ उगाए सेब

रिटायर्ड फौजी ने बदली रीत, पारंपरिक खेती छोड़ उगाए सेब

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कांगड़ा। जीवन में आगे बढ़ने का अवसर सबको ही मिलता है, लेकिन कुछ ही ऐसे लोग होते हैं जो अवसरों का उपयोग कर सफलता प्राप्त कर पाते हैं। कांगड़ा जिला (Kangra District) की तहसील शाहपुर से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है गांव दरगेला। यहीं रहते हैं प्रगतिशील, मेहनतकश और क्षेत्र के लिए अनूठी मिसाल बने बागवान कर्म चंद। कर्म चंद राज्य सरकार की योजनाओं के सफल कार्यान्वयन और सही दिशा में की गई मेहनत के सुखद परिणामों की जीती जागती मिसाल हैं। उनकी सफलता की कहानी (Story of success) अनेकों के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हो रही है और बड़ी संख्या में लोग स्वरोजगार लगाने को प्रेरित हो रहे हैं।

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बागीचा उद्यान विभाग की सहायता से लगाए थे 500 पौधे

सीआरपीएफ से 2008 में सेवानिवृत (Retired) होने के पश्चात कर्म चंद ने अपनी जमीन में अपने परिवार सहित खेती-बाड़ी का काम शुरू कर दिया परन्तु उनका मन कुछ और अच्छा करने को कर रहा था। वो चाहते थे कि कुछ ऐसा काम शुरू करें जिससे आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हो तथा गांव का नाम भी रोशन हो सके। उनके ध्यान में आया कि क्यों ने खेतों में सेब के पौधे लगाएं जाएं। उन्होंने उद्यान विभाग के अधिकारियों से संपर्क साधा तथा सेब उत्पादन बारे आवश्यक परामर्श लिया। उन्होंने 2 वर्ष पूर्व सेब का बागीचा उद्यान विभाग की सहायता से लगाया और 500 के करीब पौधे लगाए जिनमें पिछले वर्ष से सैंपल आना शुरू हो गए हैं। वह सेब को पूर्णतयः प्राकृतिक रूप से उगाते हैं। उनके इस कार्य में उनका पूरा परिवार उनका सहयोग करता है।


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बागवानी की वैज्ञानिक जानकारी होना आवश्यक

कर्म चंद बताते हैं कि विभागीय अधिकारी रैत डॉ. संजय गुप्ता व संजीव कटोच की देख रेख व निर्देशानुसार इस बगीचे की देखभाल की जा रही है। उनके अन्य दो भाईयों ने भी सेब के बगीचे लगाए हैं तथा अब इस गांव में लगभग 1500 फलदार सेब के पौधे लगे हैं। उन्होंने बताया कि वे सेब को 100-150 रुपये प्रति किलो की दर से गगल व शाहपुर में भी बेच देते हैं तथा काफी सेब घर-द्वार पर ही बिक जाता है। कर्म चंद बताते हैं कि उन्होंने अन्ना व डोरसेट किस्म के पौधे नेवा प्लांटेशन गोपालपुर से लेकर विभागीय देख-रेख पर दो वर्ष पूर्व लगाए। इनकी खेती पूर्णतयः प्राकृतिक है। रैत विकास खंड के कार्यकारी बागवानी अधिकारी संजीव कटोच ने बताया कि विभाग द्वारा बागवान को 8.5 कनाल भूमि में पौधरोपण के लिए 17 हजार रुपये, ओला अवरोधक जाली के लिए 56518 रुपये, टपक सिंचाई तथा पॉवर टिलर तथा जल भंडारण इकाई की स्थापना के लिए भी अनुदान उपलब्ध करवाया गया है। सेब की खेती से बागवान अपनी आर्थिकी सुधार सकते हैं पर इसकी बागवानी की वैज्ञानिक जानकारी होना आवश्यक है। विषय विशेषज्ञ रैत डॉ. संजय गुप्ता का कहना है कि उनकी टीम किसानों को हमेशा बागवानी हेतू प्रेरित करते रहते हैं। बागवानी सम्बन्धी कार्यों से खेती की आय में अधिक बढ़ोतरी होती है व वर्तमान में विभाग की कई योजनाएं धरातल पर चल रही हैं जिनका लाभ कोई भी ले सकता है।

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बागवानी को स्वरोजगार के रूप में अपनाने के लिए युवाओं को किया जा रहा प्रोत्साहित

उप निदेशक दौलत राम वर्मा का कहना है कि सेब उत्पादन के क्षेत्र में कांगड़ा जिले में बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है और यहां के किसान सेबों की खेती में विशेष रूचि ले रहे हैं। इससे वे स्वरोजगार लगा कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं और खुशहाल जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिला कांगड़ा के इच्छुक व्यक्तियों को उद्यान विभाग की योजनाओं का भरपूर लाभ लेना चाहिए।डीसी राकेश कुमार प्रतापति का कहना है कि बागवानी गतिविधियां स्वरोजगार का उत्तम विकल्प हैं तथा प्रदेश सरकार द्वारा लोगों विशेषकर युवाओं को बागवानी को स्वरोजगार के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। बागवानी क्षेत्र में प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप में लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। बागवानी एवं कृषि हिमाचल की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार हैं। राज्य सरकार के विशेष प्रयासों से हिमाचल ने इस क्षेत्र में देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। विभिन्न प्रकार की कृषि एवं बागवानी गतिविधियों के लिए अत्यन्त उपयुक्त प्रदेश की जलवायु का भरपूर लाभ उठाने के लिए राज्य सरकार इससे संबंधित सभी गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है।

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