मंत्रियों अधिकारियों के खर्चों में कटौती करेगी सुक्खू सरकार, एक माह में मांगी रिपोर्ट

सुक्खू सरकार सरकारी खर्च में कटौती कर घटाएगी सुविधाएं

मंत्रियों अधिकारियों के खर्चों में कटौती करेगी सुक्खू सरकार, एक माह में मांगी रिपोर्ट

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शिमला। हिमाचल पर 75 हजार करोड़ का कर्ज है। प्रदेश का सरकारी खजाना खाली है। सुक्खू सरकार के पास रोज के खर्चों को चलाने तक के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसे में सुक्खू सरकार (Sukhu Govt) ने बड़ा फैसला लिया है। सुक्खू सरकार राजस्व (Revenue) बढ़ाने के लिए मंत्रियों और अधिकारियों (Ministers and Officers) के खर्चों में कटौती करने जा रही है। इसके लिए मंत्रियों से उनके विभागों में खर्चे में कैसे कटौती की जाए और उससे किस तरह से राजस्व बढ़ाया जाए इसको लेकर एक महीने के भीतर रिपोर्ट मांगी है। सीएम सुक्खू ने सरकारी विभागों के अलावा निगम और बोर्डों (Corporations and Boards) के खर्चों को कम करने के लिए भी ऐसा ही करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित निगमों और बोर्डों के मंत्री अधिकारी इसकी रिपोर्ट सीएम को देंगे।


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सरकार का मानना है कि सरकारी स्तर पर नेताओं और अधिकारियों को दी जाने वाली सुविधाओं में कटौती करके बड़ी राशि को बचाया जा सकता है। इसके अलावा अवैध खनन (Illegal Mining) को रोककर नीलामी प्रक्रिया के तहत खनन पट्टों का आवंटन किया जाएगा। इसके साथ ही सरकारी गाड़ियों में डीजल-पेट्रोल के साथ-साथ गाड़ियों के मरम्मत कार्य में किए जाने वाले खर्चे पर भी सरकार की नजर रहेगी। अधिकारियों के टूअर प्रोग्राम (Tour Program) पर होने वाले खर्चे को कम करके कैसे उसे ऑनलाइन किया जा सकता है, सरकार इसकी संभावनाओं का पता लगाएगी।

जानकारी देते हुए उद्योग मंत्री हर्ष वर्धन चौहान (Industries Minister Harsh Vardhan Chauhan) ने कहा कि सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंत्रियों से खर्चों को कम करने और राजस्व को बढ़ाने के लिए सुझाव मांगे है। हिमाचल प्रदेश की वित्तीय हालत ठीक नहीं है। ऐसे में कैसे राजस्व बढ़ाया जाए और कर्ज के बोझ को कैसे कम किया जाए, इसको लेकर सीएम ने मंत्रियों के विभागों के खर्चों को कम करने के लिए मंत्रियों से एक महीने के भीतर रिपोर्ट मांगी है। प्रदेश के विकास को आगे ले जाने के लिए सरकार को नए सिरे से काम करना होगा। राजस्व की लीकेज कहां है व कैसे राजस्व बढ़ेगा इसको लेकर सरकार काम कर रही है।

हिमाचल पर 75 हजार करोड़ रुपए का कर्ज़ा है। सरकार का कहना है कि पूर्व सरकार 11 हजार करोड़ रुपए कर्मचारियों की देनदारियां छोडक़र गई है। ऐसे में सरकारी कोष खाली होने के चलते सरकार इसी महीने 1500 करोड़ रुपए कर्ज ले रही है, ताकि वेतन-पेंशन की अदायगी के अलावा अन्य सरकारी खर्चों को चलाया जा सके।

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