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अयोध्या में राम नवमी पर होगा रामलला का सूर्य तिलक, दिखेगा अद्भुत नजारा
Ram Navami: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी (Ram Navami) के रूप में मनाया जाता है यानी आज राम नवमी का पावन दिन है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस दिन भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। इस दिन भगवान राम और सीता के साथ मां दुर्गा और भगवान हनुमान की पूजा भी होती है। इस बार अयोध्या में राम मंदिर बन जाने के बाद रामनवमी और भी खास है। अयोध्या के राम मंदिर में इस साल रामनवमी के अवसर पर भगवान रामलला का सूर्य तिलक होगा। वहीं रामलला का सूर्यतिलक सुबह 11 बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 3 मिनट तक होगा, बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स और ऑप्टिक्स एंड एलाइड इंजीनियरिंग के वैज्ञानिकों के ग्रुप के साथ मिलकर सूर्यतिलक की खास तैयारी की है। त्रेतायुग में चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान राम का जन्म हुआ था। इस साल अयोध्या नगरी भगवान राम के जन्मोत्सव को धूमधाम से मनाने के लिए सजी है

कहा जाता है कि इस दिन भगवान राम (Lord Ram) की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में यश व सम्मान की प्राप्ति होती है। रामनवमी के दिन ही नौवीं देवी मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ चैत्र नवरात्र का समापन भी होता है इसलिए आज का दिन भक्तों के लिए बहुत खास है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस वर्ष रामनवमी के अवसर पर पूरे दिन रवि योग का शुभ संयोग बना है। इस बार राम नवमी पर भगवान राम का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन आश्लेषा नक्षत्र पूर्ण रात्रि तक है।

हिंदू पंचांग के अनुसार राम नवमी इस बार 16 अप्रैल को दोपहर में 1 बजकर 23 मिनट पर आरंभ हो जाएगी। इसका समापन 17 अप्रैल को दोपहर में 3 बजकर 14 मिनट पर होगा। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार राम नवमी का पर्व 17 अप्रैल को मनाया जाएगा। राम नवमी के दिन ही चैत्र नवरात्र का समापन भी होगा। लोग जो 9 दिन व्रत करते हैं वे राम नवमी के दिन पारण करके नवरात्रि के व्रत को पूरा करेंगे।
राम नवमी पूजा विधि –
राम नवमी के दिन सुबह जल्दी उठें।
स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान की अच्छे से सफाई कर लें।
अब हाथ में अक्षत लेकर व्रत रखने का संकल्प लें।
इसके बाद भगवान राम का पूजन आरंभ करें।
रोली, चंदन, धूप और गंध आदि से षोडशोपचार पूजन करें।
इसके बाद पूजन में गंगाजल, फूल, 5 प्रकार के फल, मिष्ठान आदि का प्रयोग करें।
भगवान राम को तुलसी का पत्ता और कमल का फूल जरूर अर्पित करें।
पूजन करने के बाद अपनी इच्छा अनुसार रामचरितमानस, रामायण या रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें।
भगवान राम की आरती के साथ पूजा संपन्न करें।
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