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बार-बार टॉयलेट आने को ना करें इग्नोर, हो सकता है किसी बड़ी बीमारी का संकेत

स्वस्थ व्यक्ति दिन में चार से छह बार जाता है टॉयलेट

बार-बार टॉयलेट आने को ना करें इग्नोर, हो सकता है किसी बड़ी बीमारी का संकेत

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सर्दियों का मौसम आते ही लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सर्दियों में कई लोगों का दिन पानी पीने और फिर बार-बार टॉयलेट जाने में निकल जाता है। स्वस्थ व्यक्ति दिन में चार से छह बार टॉयलेट जाता है, लेकिन अगर किसी को दिन में कई बार टॉयलेट (Toilet) जाना पड़ रहा है तो यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है।

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ठंड के मौसम में किसी भी व्यक्ति 5-6 बार से ज्यादा टॉयलेट लगना आम बात है, लेकिन अगर कम पानी के बाद भी ज्यादा टॉयलेट आता है तो इसके लिए हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह लेनी चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार हर व्यक्ति के साथ टॉयलेट आने की परिस्थिति अलग-अलग होती है। टॉयलेट आने का समय या मात्रा व्यक्ति की उम्र, दवा, डायबिटीज, मूत्राशय का आकार जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के एक हफ्ते के बाद टॉयलेट बार-बार आना सामान्य है। यूरिनरी ब्लैडर (मूत्राशय) (Urinary Bladder) का ज्यादा एक्टिव होना भी बार-बार टॉयलेट आने का सबसे बड़ा कारण हो सकता है। ब्लैडर की क्षमता कम होने या दबाव बढ़ने पर थोड़ा भी पानी पीने पर टॉयलेट बहुत तेजी से आता है, जिस कारण कई बार टॉयलेट को रोकना भी बेहद मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा टाइप-2 डायबिटीज (Diabetes) वाले लोगों को भी बार-बार टॉयलेट आने की परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह समस्या ब्लड में शुगर की मात्रा बढ़ने पर बढ़ जाती है, जिससे व्यक्ति को टॉयलेट करने में थोड़ी जलन भी महसूस हो सकती है।

पानी ज्यादा पीने से बार-बार टॉयलेट तो आता है, लेकिन कम पानी पीने का असर सबसे ज्यादा किडनी पर पड़ता है। किडनी में इंफेक्शन होने पर भी बार-बार टॉयलेट आता रहता है और हर बार टॉयलेट करने पर जलन भी बढ़ती रहती है। इसके अलावा यूरीनल ट्रैक्ट इंफेक्शन (Urinary Tract Infection) यूटीआई के कारण भी बार-बार टॉयलेट आने और जलन व दर्द जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पुरूषों के मुकाबले महिलाओं में यूटीआई की समस्या आम है। यूरिन इंफेक्शन के दौरान दिनभर में व्यक्ति 9 से ज्यादा बार कम मात्रा में टॉयलेट कर सकता है। वहीं, शरीर में कैल्शियम लेवल असंतुलित होने पर यह आपके शरीर में मूत्र प्रवाह पर असर डाल सकता है।

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