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इस जीव की उल्टी की कीमत करोड़ों में, बेचते पकड़ गए तो सीधा हवालात में

तैरता सोना के नाम से काफी फेमस, अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी डिमांड

इस जीव की उल्टी की कीमत करोड़ों में, बेचते पकड़ गए तो सीधा हवालात में

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मुंबई। क्या उल्टी की भी कीमत हो सकती है और वो भी करोड़ों में। पढ़ कर हैरान रह गए ना। हमारी धरती पर एक ऐसा जीव है जिसकी उल्टी की कीमत करोड़ों में है। आपको बता दें कि धरती का सबसे भारी जीव व्हेल (Whale) की उल्टी की कीमत करोड़ों में है। छह किलो की कीमत करीब पौने दो करोड़ रुपए हो सकती है। महाराष्‍ट्र (Maharastra) के पिंपरी चिंचवड में दो लोगों से 550 ग्राम व्‍हेल की उल्‍टी बरामद की गई है। इसकी कीमत 1.1 करोड़ रुपए से अध‍िक बताई गई है। इसकी तस्‍करी में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, क्योंकि यह गैर कानूनी काम में आता है। व्‍हेल की उल्‍टी को एम्‍बरग्रीस (Ambergris) के नाम से जानते हैं। आम भाषा में इसे तैरता सोना कहा जाता हैं। व्‍हेल की उल्‍टी में ऐसा क्‍या है, जिसके कारण इसकी कीमत करोड़ों में हैं। इसका किसलिए इस्‍तेमाल किया जाता है। इन सवालों का जवाब यही है। व्हेल की उल्टी एक तरह का अपशिष्‍ट पदार्थ होता हैए जो व्‍हेल की आंतों से निकलता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि समुद्र (Sea) में व्‍हेल कई तरह की चीजें खाती हैं। कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जिसे मछली (Fish) पचा नहीं पाती वो इसी को बाहर निकालती है, जिसे एम्‍बरग्रीस कहते हैं।

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यह स्‍पर्म व्‍हेल की आंत में बनती है और उल्‍टी के जरिए बाहर निकलती है। स्‍पर्म व्‍हेल एक लुप्‍तप्राय प्रजाति है। विशेषज्ञों के मुताब‍िकए ताजी उल्‍टी का रंग पीला होता है। कुछ समय यह भूरे रंग के मोम की तरह दिखती है। इसके बाद रंग ग्रे या काला भी हो सकता है। यह मोम की तरह दिखने वाला पत्‍थर जैसा पदार्थ होता है। इससे तेज और बुरी गंध आती है। व्‍हेल की उल्‍टी का इस्‍तेमाल परफ्यूम (Perfume) बनाने में किया जाता है। खास बात है कि इस उल्‍टी से तैयार होने वाले परफ्यूम की खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है। इसके अलावा दवाओं (Medicine)और सेक्‍स से जुड़ी समस्‍याओं में भी इसका इस्‍तेमाल किया जाता हैए इसलिए इसकी कीमत करोड़ों में होती है। अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में इसकी काफी मांग है। एम्बरग्रीस की बिक्री कानून गैर कानूनी है। दरअसल, स्पर्म व्हेल एक लुप्तप्राय प्रजाति है, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित है। स्पर्म व्हेल को 1970 में लुप्तप्राय प्रजाति घोषित किया गया था। कई बार लोगों को इस बिक्री के लिए गिरफ्तार भी किया गया है। एम्‍बरग्रीस की कीमत करोड़ों में होने के कारण बड़े स्‍तर पर इसकी तस्‍करी की जाती है। अगस्‍त में भी पूणे डिव‍िजन के फोरेस्‍ट डिपार्टमेंट ने छह लोगों को तीन किलो व्‍हेल की उल्‍टी के साथ गिरफ्तार किया था। भारत (India) में मुंबई (Mumbai), तमिलनाडु और केरल (kerala) में बड़ी मात्रा में एम्‍बरग्रीस बरामद की जा चुकी है।

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