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केंद्रीय मंत्री अनुराग के गृह जिले का हाल: चारपाई पर लाद कर अस्पताल ले जा रहे थे परिजन, बीच रास्ते कराना पड़ा प्रसव

मोदी युग में स्वर्णिम विकास का सपना दिखा वाले अनुराग ठाकुर के गृह जिले का पिलियार गांव सड़क सुविधा से अछूता

केंद्रीय मंत्री अनुराग के गृह जिले का हाल: चारपाई पर लाद कर अस्पताल ले जा रहे थे परिजन, बीच रास्ते कराना पड़ा प्रसव

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हमीरपुर। देश को आजाद हुए 75 साल हो गए हैं। हिमाचल (Himachal) को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले 50 साल। देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। राज्य सवर्णिम महोत्सव। हिमाचल सहित केंद्र में बीजेपी की सरकार है। केंद्र में बीजेपी (BJP) की सरकार को आए 7 साल हो गए हैं। राज्य में चार साल, लेकिन हालत आज तक नहीं सुधरी है। और जवाबदेही के नाम पर पुराना राग अलाप लिया जाता है। लेकिन परेशानी तो आम जनता को झेलनी पड़ती है। सड़क सुविधा नहीं होने के चलते आज भी ग्रामीण मरीजों को खाट पर लाद कर मुख्य सड़क तक पहुंचाते हैं।

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गांव तक नहीं जाती सड़क

हिमाचल को मोदी युग में स्वर्णिम विकास का सपना दिखाने वाले केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर (Cabinet Minister Anurag Thakur) और सीएम जयराम (CM Jairam) इस तस्वीर को एक बार देख लें। यह तस्वीर हिमाचल में बुनियादी सुविधा की हकीकत बयां कर रही है। जिस जिले केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और उनके पिता व पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल का ताल्लुक है। वहां के एक गांव के लिए सड़क सुविधा नहीं है।

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खुले आसमान के नीचे दिया बच्चे को जन्म 

जिसके चलते बड़सर उप मंडल के गांव पिलियार में एक महिला ने खुले आसमान के नीचे बच्चे को जन्म दिया। उसके घर से सड़क मार्ग 2 किलोमीटर दूर था। परिजन उसे चारपाई पर उठाकर सड़क तक ले जाने के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में ही प्रसव पीड़ा बढ़ गई और उसे खुले आसमान के नीचे बच्चे को जन्म देना पड़ा। हालांकि, जच्चा-बच्चा ठीक हैं और इस समय अस्पताल में उपचाराधीन हैं। देशभर में सड़कों के जाल के रूप में हमीरपुर मशहूर है, लेकिन इसी जिले की इस तस्वीर ने हैरानी में डाल दिया है। सड़कों का जाल है, तो आखिर है कहां? ग्रामीणों को यह सड़क दिखती क्यों नहीं।

क्या है पूरा मामला

मिली जानकारी के मुताबिक, गांव पिलियार के सुगल निवासी संतोष कुमार की पत्नी नेहा को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। संतोष कुमार ने बड़सर अस्पताल में डॉक्टर राकेश से बात की और वह नेहा को लेकर हॉस्पिटल के लिए रवाना हो गए। इस बीच उन्होंने नेहा की प्रसव पीड़ा की सूचना आशा वर्कर सुषमा को भी दे दी। वह उनके साथ हॉस्पिटल के लिए रवाना हो गई है। लेकिन गांव तक सड़क ना होना बड़ी बाधा बन गया। इसलिए परिजनों और सगे संबंधियों ने नेहा को चार कंधों पर चारपाई पर उठाया और सड़क की तरफ रवाना हो गए। लेकिन रास्ते में ही प्रसव पीड़ा से प्रसूता कराहने लगी। जिसके चलते आशा वर्कर ने बीच जंगल में नेहा की डिलीवरी करवा दी।

बच्चे पीजीआई रेफर 

फिलहाल मां और बच्चे को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से बच्चे को थोड़ी दिक्कत होने के कारण पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया है। हुजूर अब सवाल का जबाव तो दीजिए, स्वर्णिम विकास तो दूर यहां तो सड़क सुविधा को ग्रामीण तरस रहे हैं?

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