-
Advertisement
मौनी अमावस्या पर आज करेंगे ये काम तो मिलेगा पुण्य, जानें स्नान का महत्व
Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या का ज्योतिष शास्त्र में बहुत महत्व है। मौनी अमावस्या का शाब्दिक अर्थ है ‘मौन रहने वाली अमावस्या’। इस दिन श्रद्धालु गंगा, नर्मदा समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान करेंगे । मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान करने पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। इस दिन मौन व्रत रखने का विधान है हालांकि गृहस्थ लोगों के लिए दिन भर मौन रह पाना थोड़ा मुश्किल है। ऐसे में गृहस्थ लोग पूजा-पाठ करने के बाद अपना मौन व्रत खोल सकते हैं।
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि का शुभारंभ 18 जनवरी की रात 12 बजकर 03 मिनट से होगा और इसका समापन 19 जनवरी की रात 1 बजकर 21 मिनट पर होगा। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, यह पर्व 18 जनवरी को मनाया जाएगा।

शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन का धार्मिक महत्व अधिक है। मौनी अमावस्या के दिन व्रत करने वाले व्यक्ति को दान करना चाहिए। इस दिन जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाना चाहिए। ऐसा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक इस दिन तेल, कंबल, दूध ,चीनी, अनाज तथा अपने आवश्यकता अनुसार पैसों का दान करना चाहिए। इसके अलावा मौनी अमावस्या के दिन पशु-पक्षियों को भोजन करना चाहिए। ऐसा करते श्री पित्र प्रसन्न होते हैं और जीवन में आ रही तमाम समस्याओं से मुक्ति मिलती है।
क्या करें
इस दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान करें। यदि आप गंगा स्नान नहीं कर सकते हैं, तो पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
स्नान के बाद सूर्य देवता को अर्घ्य जरूर दें। ध्यान रहे स्नान करने से पहले तक कुछ बोलें नहीं।
मौनी अमावस्या के दिन ज्यादा से ज्यादा ध्यान, प्रार्थना व अन्य धार्मिक क्रिया करें। इस दिन दान जरूर करें।
जरूरतमंद लोगों की मदद करें। निस्वार्थ कार्य करना इस दिन शुभ फलदायी होता है।
मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में डुबकी लगाएं ताकि शरीर और आत्मा दोनों शुद्ध हो जाएं।
मौनी अमावस्या के दिन उपवास करें, ऐसा करना शुभ फल देता है।
हिमाचल और देश-दुनिया की ताजा अपडेट के लिए join करें हिमाचल अभी अभी का Whats App Group
