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हिमाचल हाईकोर्ट ने लाखों का सेब खराब होने पर बागबानी विभाग से मांगा जवाब
शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट (Himachal High Court) ने शिमला जिला के ठियोग क्षेत्र में हिम एग्रि फ्रेश प्राइवेट लिमिटेड कोल्ड स्टोर में लापरवाही के चलते लाखों रुपए का सेब खराब होने की भरपाई की मांग को लेकर दायर मामले का कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मोहन ऑर्चर्ड तथा राजेंद्र मेहता व अन्य द्वारा दायर याचिकाओ की प्रारंभिक सुनवाई के बाद राज्य सरकार के बागवानी विभाग (Horticulture Department ) से जवाब तलब किया है। याचिकाओं में दिए तथ्यों के अनुसार प्रदेश में हिम एग्रि फ्रेश प्राइवेट लिमिटेड को कोल्ड स्टोर (Cold Store) स्थापित करने के लिए 80 फ़ीसदी सब्सिडी राज्य सरकार द्वारा मुहैया करवाई गई।
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यही नहीं कोल्ड स्टोर के निर्माण के लिए भूमि लीज पर भी दी गई। प्रार्थियों का यह आरोप है कि उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाला सेब जिसकी कीमत लाखों में है को हिम एग्रि फ्रेश प्राइवेट लिमिटेड के कोल्ड स्टोर में सितंबर व अक्टूबर 2021 में रखा था। कोल्ड स्टोर में रखे गए सेब को मई 2022 को जब प्रार्थियों ने हिम एग्रि फ्रेश प्राइवेट लिमिटेड से मांगा। फिर उन्होंने देखा कि कुछ सेब सुख गए है कुछ खराब हो गए है और कुछ नरम पड़ गए है।

प्रार्थी का यह आरोप है कि यह सेब प्रतिवादी कंपनी की लापरवाही के चलते खराब हुए हैं। राज्य सरकार ने प्रतिवादी कंपनी को कोल्ड स्टोर खोलने के लिए 80 फ़ीसदी सब्सिडी की राहत के साथ साथ लीज पर भूमि भी मुहैया करवाई। अब यह स्थिति है कि प्रतिवादी कंपनी प्रदेश के सेब बागवानों से धोखा कर रही है। जो प्रार्थियों के सेब लाखों की कीमत में बेचे जाने थे वह प्रतिवादी कंपनी की लापरवाही के चलते किसी भी काम के नही रहे हैं। प्रार्थियों ने प्रदेश उच्च न्यायालय से यह गुहार लगाई है कि उन्हें धोखाधड़ी से बचाया जाए और प्रतिवादी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार को आदेश दिए जाएं। इसके अलावा राज्य सरकार को यह भी आदेश दिए जाएं कि वह एक उपयुक्त कमेटी का गठन करें जो समय-समय पर कोल्ड स्टोर की निगरानी करती रहे।

हिमाचल हाईकोर्ट ने तहसीलदार ठियोग के खिलाफ कार्रवाई के दिए आदेश
हिमाचल हाईकोर्ट ने कानून के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन ना करने पर तत्कालीन तहसीलदार ठियोग जिला शिमला के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के आदेश जारी किए। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने वित्तीय आयुक्त को यह आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई विभागीय शुरू करने तक ही सीमित न हो। मामले के अनुसार गांव दौरा तहसील ठियोग निवासी लायक राम शर्मा ने तहसीलदार ठियोग के समक्ष दीवानी मुकदमे के आधार पर इंतकाल चढ़ाने का आवेदन किया।
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17 जून 2021 को तहसीलदार ठियोग ने इंतकाल चढ़ाने के आवेदन को रद्द करते हुए कहा कि प्रार्थी ने आवेदन करने में बहुत देर कर दी और दस्तावेज 34 वर्ष बाद प्रस्तुत किए गए हैं। कोर्ट ने इंतकाल से जुड़े कानूनों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि कानून के तहत इंतकाल के लिए देरी से किए गए आवेदन को खारिज नहीं किया जा सकता बल्कि निर्धारित जुर्माना वसूल कर इंतकाल चढ़ाया जा सकता है। कानून में देरी के आधार पर इंतकाल चढ़ाने से इंकार करना कानूनन गलत है। मामले पर अगली सुनवाई 29 दिसम्बर को निर्धारित की गई है।
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