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हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, शिमला पुलिस की जांच पर DGP ने उठाए सवाल
Vimal Negi Death case: हिमाचल हाईकोर्ट में HPPCL के चीफ इंजीनियर विमल नेगी मौ्तर मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है । न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत में बुधवार को मामले की सुनवाई हुई। मामले पर एक-दो दिनों में हाईकोर्ट कोर्ट का फैसला आ सकता है। वहीं अदालत की अनुमति के बिना अब शिमला पुलिस इस मामले में चार्जशीट दायर नहीं कर पाएगी। कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है। डीजीपी द्वारा कोर्ट में दायर स्टेट्स रिपोर्ट में पता चला है कि सएएआई पंकज ने विमल नेगी की जेब में मिला पेन ड्राइव अपनी जेब में रख दिया था और सबूतों से छेड़छाड़ गई है। इस मामले में आज दो घंटे से भी ज्यादा वक्त तक अदालत में बहस हुई।
अदालत को दो रिपोर्ट सौंपी गई
सरकार की ओर से अदालत को दो रिपोर्ट सौंपी गई हैं। एक अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह ओकार चंद शर्मा की प्रशासनिक जांच रिपोर्ट है तो दूसरी पुलिस की ओर से 134 पृष्ठों की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट दी गई है। अदालत ने इन दोनों जांच रिपोर्ट को अपने रिकॉर्ड में रख लिया है। परिजनों ने अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा द्वारा की गई जांच रिपोर्ट भी उन्हें देने की मांग की। कोर्ट ने विमल नेगी के परिजनों की मांग पर DGP-SP की स्टेट्स रिपोर्ट उन्हें सौंपने के आदेश दिए। सरकार ने इसका विरोध किया और कहा, इसे अभी सरकार को देखना है। इस पर कोर्ट ने कहा, अतिरिक्त मुख्य सचिव की जांच रिपोर्ट परिजनों को देने पर विचार किया जाएगा।
एक एसआईटी ने छुपा लिया था पेन ड्राइव…
पलिस ने दो अलग-अलग स्टेटस रिपोर्ट दायर की हैं। महाधिवक्ता अनूप रतन ने अदालत को बताया कि इन दोनों रिपोर्ट के बारे में सरकार को पता नहीं है। सरकार निष्पक्ष जांच चाहती है। सरकार अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह ओंकार शर्मा की रिपोर्ट को समय आने पर सार्वजनिक तौर पर स्वयं पेश करेगी, जिससे परिजनों को न्याय मिले और जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, उसमें भी निष्पक्षता हो। उन्होंने बताया कि विमल नेगी के लापता होने से पहले डीजीपी ने एक एसआईटी गठित की थी। दूसरी एसआईटी सरकार की ओर से विमल नेगी की मौत के बाद गठित की गई। डीजीपी की ओर से गठित एसआईटी के एक अधिकारी ने पेन ड्राइव छुपा लिया था। इसे सरकार की ओर से गठित दूसरी एसआईटी ने अपने कब्जे में कर दिया।
कुलभू,ण खजूरिया

