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हिमाचल की 63 समेत देशभर की 220 दवाओं के सैंपल फेल, कारण बताओ नोटिस जारी
CDSCO Drug Alert: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ओर से जारी अगस्त माह के ड्रग अलर्ट में देशभर की फॉर्मा इंडस्ट्री में निर्मित 221 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इसमें सबसे बड़ा झटका हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योग को लगा है, जहां निर्मित 63 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें बच्चों के सिरप, एंटीबायोटिक, हार्ट, बुखार, खांसी, पेट, किडनी और आंखों की दवाओं के साथ-साथ कई इंजेक्शन और विटामिन उत्पाद भी शामिल हैं।
राज्य और केंद्रीय प्रयोगशालाओं में हुई जांच
ड्रग अलर्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, गुणवत्ता जांच में फेल हुए कुल 220 नमूनों में से 191 दवाओं की जांच राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं (State Drug Testing Laboratories) में और 29 की जांच केंद्रीय प्रयोगशालाओं में की गई। इसके अलावा जांच के दौरान एक दवा का सैंपल नकली भी पाया गया है।
किस राज्य की कितनी दवाएं हुईं फेल?
CDSCO की रिपोर्ट के अनुसार राज्यों का आंकड़ा इस प्रकार है:
हिमाचल प्रदेश: 63 (कहीं-कहीं 64 का उल्लेख)
उत्तराखंड: 39
गुजरात: 17
महाराष्ट्र: 16
मध्य प्रदेश: 12
तमिलनाडु व हरियाणा: 11-11
सिक्किम व उत्तर प्रदेश: 09-09
पंजाब: 08
हिमाचल के सोलन और सिरमौर जिले सबसे ज्यादा प्रभावित
हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक असर सोलन जिले की कंपनियों पर पड़ा है, जहां की 33 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। दूसरे स्थान पर सिरमौर जिला रहा, जहां की 24 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं। इसके अलावा ऊना की 4, कांगड़ा की 2 और बिलासपुर की 1 कंपनी का सैंपल फेल हुआ है।
राज्य के बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, कुमारहट्टी, परवाणू, सोलन और कांगड़ा स्थित औद्योगिक इकाइयों के उत्पाद इस सूची में शामिल हैं।
इन प्रमुख दवाओं और बीमारियों के सैंपल हुए फेल
जांच में जिन प्रमुख दवाओं और साल्ट्स के नमूने फेल पाए गए हैं, उनमें शामिल हैं:
एंटीबायोटिक्स व संक्रमण: सिफ्योरोक्सिम एक्सेल (गले-कान के संक्रमण), सैफोडाइऑक्साइड ओरल सस्पेंशन, एजिथ्रोमाइसीन एंड लैक्टिक एसिड बेसिलस, एमिकासिन सल्फेट इंजेक्शन (बैक्टीरियल इंफेक्शन) और एंटीबायोटिक लाइनजोलिड टेबलेट।
बच्चों की दवाएं: पेरासिटामोल पेडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन (इन्फेक्शन/बुखार), मोंटेलुकास्ट और लेवोकेटिरिजिन सिरप (एलर्जी)।
डायबिटीज व ब्लड प्रेशर: सिटागलिप्टिन फाॅस्फेट एंड मेटफॉर्मिन, विल्डागलिप्टिन टेबलेट।
दर्द, सूजन व अल्सर: एसिक्लोफिनेक पेरासिटामोल और सेराटियोपेप्टीडस (गठिया/जोड़ों का दर्द), राबेप्राजोले सोडियम इंजेक्शन और एस्माप्राजोल मैग्नीशियम (गैस्ट्रिक/अल्सर)।
अन्य दवाएं: कैल्शियम कार्बोनेट विद विटामिन डी-3, इट्राकोनाजोल (दाद/खुजली), प्रेगाबलीन (मिर्गी) और मैकोबालम इन अल्फा लाइपो की एसिड (पोषक तत्वों की कमी)।
जांच में सामने आईं ये खामियां
प्रयोगशाला जांच में दवाएं कई पैमानों पर असफल रहीं। मुख्य रूप से दवाओं की घुलने की क्षमता (Dissolution), एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (प्रभावी औषधीय तत्व) की सही मात्रा, निष्क्रमण (Sterility), पीएच (pH) मान और निर्धारित कणों की सीमा जैसे मानकों में गड़बड़ी पाई गई। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुछ कंपनियों के दो से अधिक और बार-बार सैंपल फेल हुए हैं।
बिक्री और वितरण पर रोक, कारण बताओ नोटिस जारी
राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि जिन कंपनियों के नमूने गुणवत्ता जांच में असफल रहे हैं, उन्हें तुरंत ‘कारण बताओ’ (Show Cause) नोटिस जारी कर दिए गए हैं। संबंधित बैचों की बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। कंपनियों से जवाब तलब किया गया है और प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगामी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अनु गुप्ता
