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जांबाज अंकेश के पिता बोले: मैंने ससुराल भेजा है बेटा, उनके हौंसले को हर कोई कर रहा सलाम
बिलासपुर। अरुणाचल के केमांग में हिमस्खलन की चपेट में शहीद हुए बिलासपुर (Bilaspur) जिले के जांबाज सैनिक अंकेश भारद्वाज के पिता बांचा राम का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे को दूल्हा बनाकर ससुराल भेजा है। बता दें कि अंकेश भारद्वाज के पिता बांचा राम ने कहा कि बेटे के सिर सेहरा सजाने का ख्वाब तो पूरा नहीं हुआ, लेकिन बांचा राम ने जिस तरह से शहीद बेटे की अंतिम विदाई (Last Farewell) की उसको देखकर हर कोई उनके हौंसले को सलाम कर रहा है। बांचा राम ने आज अपने बेटे शहीद बेटे को दूल्हे (Groom) की तरह तैयार किया। इस दौरान बांचा राम ने खुद भी कोट पेंट और सिर पर पगड़ी पहने हुई थी। उन्होंने पूरे घर को लड़ियों और पत्रमाला से सजाया गया था। टेंट और स्वागत गेट लगाया गया था। रविवार को आठ दिन बाद जैसे ही अंकेश भारद्वाज की पार्थिव देह घर के आंगन में पहुंची तो रो-धोकर नहीं बल्कि पिता बांचा राम ने पूरी तरह से तैयार होकर (कोट-पेंट और पगड़ी पहनकर) उसका स्वागत किया।
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पार्थिव शरीर आते ही वहां शहीद अंकेश भारद्वाज (Martyr Ankesh Bhardwaj) अमर रहे के नारे लगने लगे। युवाओं समेत महिलाओं और बुजुर्गों ने पुष्प वर्षा से शहीद का स्वागत किया। शहीद अंकेश के सम्मान में 300 फीट के तिरंगे के साथ तिरंगा यात्रा दधोल से शुरू की गई थी। इसके अलावा युवाओं ने बाइक रैली निकालकर शहीद को श्रद्धांजलि दी। माता-पिता ने बेटे को दूल्हे की तरह सजाकर अंतिम विदाई दी। बैंड पर जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी गीत की धुन बज रही थी और आसमान में आतिशबाजी के बीच शहीद को घर से विदा किया गया। शहीद का अंतिम संस्कार (Funeral) पूरे सैन्य सम्मान के साथ घुमारवीं उपमंडल के सेऊ में किया गया। छोटे भाई ने बड़े भाई की चिता को मुखाग्नि दी। सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई दी। शहीद अंकेश भारद्वाज के पिता भले ही बेटे को दूल्हा बनाने की हसरत पूरी न कर पाए हों, लेकिन उसकी अंतिम विदाई उन्होंने धूमधाम से की।
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