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आज़ादी का अमृत महोत्सव: सीएम जयराम बोले-प्रदेश में अब तक 170 विशेष कार्यक्रम आयोजित

राज्यपाल और सीएम जयराम ने राष्ट्रीय समिति की बैठक में भाग लिया

आज़ादी का अमृत महोत्सव: सीएम जयराम बोले-प्रदेश में अब तक 170 विशेष कार्यक्रम आयोजित

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शिमला। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर (Governor Rajendra Vishwanath Arlekar) और सीएम जयराम ठाकुर ने शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आज़ादी का अमृत महोत्सव (Azadi ka Amrit Mahotsav) के आयोजन के लिए गठित राष्ट्रीय समिति की तृतीय बैठक में भाग लिया। पीएम नरेंद्र मोदी ने इस बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सीएम जयराम ठाकुर ने बताया कि प्रदेश सरकार आजादी का अमृत महोत्सव के अन्तर्गत राष्ट्रीयता की मूल भावना के अनुरूप विभिन्न आयोजन कर रही है। उन्होंने कहा कि अभी तक पूरे प्रदेश में 170 विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। सीएम ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा हर घर तिरंगा अभियान के अन्तर्गत उपायुक्तों के माध्यम से 17.50 लाख झंडे उपलब्ध करवाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों और स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों के योगदान से संबंधित साहित्य का भी प्रकाशन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में डीसी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय डिजिटल ज्ञान कोष (District Level Digital Gyan Kosh) स्थापित किया जा रहा है जिसमें वहां के स्वतंत्रता सेनानियों, ऐतिहासिक स्थलों, प्रमुख हस्तियों और कला एवं शिल्प से संबंधित डेटा बैंक तैयार किया जा रहा है।

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75 गांवों की ऐतिहासिक विरासत को संजोने पर किया जा रहा कार्य

जय राम ठाकुर (CM Jai Ram Thakur) ने कहा कि प्रदेश के 75 गांवों की ऐतिहासिक विरासत को संजोने के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को एक परियोजना प्रेषित की गई है ताकि इन गांवों की समृद्ध संस्कृति और परम्पराओं को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि मेरा गांव मेरी धरोहर के अन्तर्गत कुल 8059 गांवों में से 7794 गांवों का सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इन गांवों की सांस्कृतिक धरोहर के बारे में जागरूकता लाने के दृष्टिगत प्रयास किए जाएंगे। बैठक में केंद्रीय मंत्रियों, राज्यपालों, उप राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया।

राज्यपाल बोले प्राकृतिक खेती को दिया गया बढ़ावा

राज्यपाल ने प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए की गई विभिन्न पहलों, पौधरोपण अभियान और संस्कृत भाषा को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने सीमावर्ती किन्नौर और लाहुल-स्पीति जिलों का दौरा कर वहां के लोगों से संवाद किया। इस दौरान वहां की संस्कृतिए विकासात्मक योजनाओं और अन्य स्थानीय मुद्दों जैसे सड़कों के निर्माण में वन अधिनियम के कारण आने वाली बाधाओं इत्यादि पर चर्चा की गई।

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