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“ब्लैक फंगस” से निपटने की तैयारी, आईजीएमसी में बनी चार डॉक्टरों की कमेटी

हिमाचल में अभी तक सामने नहीं आया ब्लैक फंगस का कोई भी मामला

“ब्लैक फंगस” से निपटने की तैयारी,  आईजीएमसी  में बनी चार डॉक्टरों की कमेटी

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शिमला। देश में बढ़ रहे कोरोना संक्रमितों की संख्या सरकार की चिंता बढ़ा रही है, वहीं “ब्लैक फंगस” के मामले भी डरा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में हालांकि अभी तक इस बीमारी का कोई भी मामला सामने नहीं आया है लेकिन राजस्थान ने इसे महामारी घोषित कर दिया है इससे पहले हरियाणा ने भी इसे महामारी घोषित कर चुका है। इसके बावजूद देश में “ब्लैक फंगस” (black fungus)के बढ़ते मामलों को देखते हुए आईजीएमसी (IGMC) प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। इसके लिए चार डॉक्टरों की कमेटी भी इसके लिए बना दी गई है।

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अभी तक हिमाचल प्रदेश में ब्लैक फंगस का कोई भी मामला सामने नहीं आया है लेकिन एहतियात के तौर पर प्रशासन ने पहले ही तैयारी करनी शुरू कर दी है। आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक जनक राज ने बताया कि आईजीएमसी प्रशासन ने ब्लैक फंगस को ध्यान में रखते हुए 4 डॉक्टर, जिसमें आंख ,ईएनटी, डेंटल और माइक्रोलॉजी विभाग के विशेषक्ष शामिल ही, की कमेटी बनाई है ताकि इस तरह के मरीजों का समय पर ईलाज किया जा सके। डॉ जनक राज ने बताया कि अस्पताल में वेंटिलेटर की कोई कमी नहीं है। आईजीएमसी में अब वेंटिलेटर की संख्या 120 हो गई है। फिलहाल 32 मरीजों का वेंटिलेटर पर इलाज चल रहा है। 5-10 वेंटिलेटर को हमेशा रिजर्व में रखा गया है ताकि आपातकाल की स्थिति में मरीज के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सके।सरकार लागातार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का काम कर रही है ताकि मरीजों की जान को बचाया जा सके।


आखिर क्या है ब्लैक फंगस और क्यों होता है?

कोरोना पीड़ितों को कोरोना संक्रमण के प्रभाव को कम करने के लिए स्टेरॉयड दिया जाता है। इससे इंसान की इम्यूनिटी कम हो जाती है। इससे मरीज का ब्लड शुगर का लेवल भी अचानक बढ़ने लग जाता है। इसका साइड इफेक्ट म्यूकोरमाइकोसिस के रूप में झेलना पड़ रहा है। प्रारम्भिक तौर पर इस बीमारी में नाक खुश्क होती है। नाक की परत अंदर से सूखने लगती है व सुन्न हो जाती है। चेहरे व तलवे की त्वचा सुन्न हो जाती है। चेहरे पर सूजन आती है। दांत ढीले पड़ते हैं। इस बीमारी में आंख की नसों के पास में फंगस जमा हो जाता है, जो सेंट्रल रेटाइनल आर्टरी का ब्लड फ्लो बंद कर देता है। इससे अधिकांश मरीजों में आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली जाती है। इसके अलावा कई मरीजों में फंगस नीचे की ओर फैलता है तो जबड़े आदि को खराब कर देता है।

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