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कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह पर FIR, NHAI अधिकारी ने लगाए मारपीट के आरोप
Anirudh Singh: हिमाचल प्रदेश सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के प्रोजेक्ट मैनेजर अचल जिंदल ने मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले में शिमला के ढली थाना में शिकायत के आधार पर मंत्री के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। अनिरुद्ध सिंह पर जिंदल ने शिमला के भट्ठाकुफर क्षेत्र में बीते सोमवार को मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। वहीं सेंट्रल इंजीनियरिंग सर्विस ऑफ़िसर एसोसिएशन ने मामले को लेकर नितिन गडकरी को पत्र लिखा है।
https://twitter.com/NHAIENGINEERS/status/1939721866782073291
इस मामले में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहाकि सरकार के मंत्री की मौजूदगी में एनएचएआई अधिकारियों के साथ मारपीट बेहद निंदनीय है। मुख्यमंत्री को तत्काल ऐसे मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए और उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना चाहिए।
कांग्रेस सरकार के मंत्री द्वारा अपने साथियों के साथ NHAI के अधिकारी पर जानलेवा हमला किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि अभी तक इस मामले में न तो कोई कार्रवाई की गई और न ही कोई FIR दर्ज हुई है।
मुख्यमंत्री को इस मामले पर त्वरित संज्ञान लेने की आवश्यकता है… pic.twitter.com/SxVtDW2gI1
— BJP Himachal Pradesh (@BJP4Himachal) June 30, 2025
एनएचएआई के शिमला में प्रोजेक्ट मैनेजर अचल जिंदल ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें एसडीएम शिमला ग्रामीण के कार्यालय में 11:30 बजे एक बैठक के लिए बुलाया गया था। उनके साथ साइट इंजीनियर योगेश भी उपस्थित थे। एसडीएम कार्यालय में उपस्थित न होने के कारण दोनों अधिकारियों को भट्टाकुफर बुलाया गया, जहां मंत्री अनिरुद्ध सिंह व अन्य स्थानीय लोग मौके पर पहले से मौजूद थे। जिंदल के अनुसार, मौके पर मंत्री को एक भवन गिरने की जानकारी दी जा रही थी। इस दौरान मंत्री ने कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग करना शुरू कर दिया और फिर पास ही एक कमरे में ले जाकर स्थानीय लोगों की मौजूदगी में मारपीट की गई।
घटना के समय एसडीएम और अन्य अधिकारी भी मौजूद
अचल जिंदल ने बताया कि पानी के घड़े से उनके सिर पर वार किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और खून बहने लगा। जब उनके साथ मौजूद साइट इंजीनियर योगेश ने उन्हें बचाने का प्रयास किया तो उसके साथ भी मारपीट की गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि घटना के समय एसडीएम और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे, लेकिन किसी ने बचाने की कोशिश नहीं की। दोनों अधिकारी जान बचाकर अपनी गाड़ी से आईजीएमसी पहुंचे, जहां उन्हें भर्ती किया गया और उनका इलाज जारी है। इस मामले की प्रतिलिपि NHAI के क्षेत्रीय कार्यालय शिमला, मुख्यालय और परियोजना निदेशक को भी भेजी गई है।

