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गुड़िया मामला सुलझाने वाली CBI की DSP सीमा पाहुजा के जिम्मे आया हाथरस कांड; पड़ताल शुरू

सीमा को 15 अगस्त 2014 को पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था

गुड़िया मामला सुलझाने वाली CBI की DSP सीमा पाहुजा के जिम्मे आया हाथरस कांड; पड़ताल शुरू

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नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के चर्चित गुड़िया मामले की गुत्थी को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सीबीआई की पुलिस उपाधीक्षक (DSP) सीमा पाहुजा को हाथरस कांड (Hathras Case) की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के आग्रह पर सीमा पाहुजा (Seema Pahuja) के नेतृत्व में गठित की गई एक टीम ने इस मामले में जांच पड़ताल शुरू कर दी है। उनकी अगुवाई में सीबीआई की टीम हाथरस के चंदपा पुलिस स्टेशन पहुंच भी चुकी है। साफ और ईमानदार छवि के चलते और अपने काम को बिना किसी दबाव के अंजाम देने वाली पाहुजा को हिमाचल प्रदेश के चर्चित गुड़िया मामले की गुत्थी को सुलझाने के लिए भेजा गया था।


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उन्होंने गुड़िया मामले में जांच कर सारे मामले को सुलझाया भी था। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि गाज़ियाबाद की सीबीआई यूनिट के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी में तैनात डीएसपी सीमा पाहूजा हाथरस कांड का भी हल जल्द निकाल लेंगी। तेज तर्रार छवि वाली महिला अफसर मानी जाने वाली सीमा पाहुजा को ब्यूरो में सराहनीय काम के लिए पुलिस पदक समेत कई सम्मान मिल चुके हैं। कई गंभीर मामलों का खुलासा करने के लिए सीमा पाहुजा को जाना जाता है। सीबीआई में सराहनीय सेवाओं के लिए सीमा को 15 अगस्त 2014 को पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। इससे पहले सीमा पाहुजा ने सीबीआई की स्पेशल क्राइम यूनिट-1 में कई सालों तक काम किया। उनके लिए विभाग में कहा जाता है कि जो केस डीएसपी सीमा पाहुजा को मिलता है, तो उस केस में आरोपी बच नहीं पाते। हाथरस कांड की जांच करने वाली टीम में अधिकारियों समेत लगभग 15 सदस्य शामिल हैं।

मामले में पुलिस की कार्रवाई से नाराज है हाईकोर्ट

इस सब के बीच हाथरस गैंगरेप कांड को लेकर सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई हुई। दो जजों की बेंच के सामने पीड़िता के परिवार ने अपना पक्ष रखा। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भी कई अधिकारी अदालत में मौजूद रहे। हाईकोर्ट में आज की सुनवाई खत्म हो गई है। हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। इस मामले की सुनवाई 2 नवंबर को होगी। पीड़िता के परिजनों ने कोर्ट में भी कहा कि अंतिम संस्कार उनकी सहमति के बिना रात के समय कर दिया गया। परिजनों ने यह भी कहा कि अंतिम संस्कार में हमें शामिल तक नहीं किया गया। परिजनों ने आगे जांच में फंसाए जाने की आशंका जताई और साथ ही सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई।

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