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भूमि अधिग्रहण के मामलों में रिटायर्ड जजों को मध्यस्थ बनाएं: हाईकोर्ट
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीशों या अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों (Retired Judges) को मध्यस्थ के तौर पर शक्तियां प्रदान करने बाबत विचार करने के आदेश दिए हैं।
न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने इसके लिए NHAI और केंद्र सरकार को विचार करने को कहा है। केंद्र सरकार ने दिनांक 22.3.2012 के आदेश के तहत राजस्व जिलों शिमला और सोलन के लिए मंडलायुक्त शिमला और बिलासपुर, मंडी और कुल्लू के राजस्व जिलों के लिए मंडलायुक्त मंडी को मध्यस्थ नियुक्त किया और उन्हें सभी कार्यों का अधिकार दिया है। हालांकि, न्यायालय को सूचित किया गया कि मंडलायुक्त शिमला के समक्ष कुल 869 मामले लंबित हैं और मंडलायुक्त आयुक्त, मंडी के समक्ष कुल 2660 मामले लंबित हैं, जिनमें से कुछ मामले तो वर्ष 2015 से संबंधित हैं।
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काम का भारी बोझ, समय नहीं है
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने न्यायालय के ध्यान में यह भी लाया कि मंडलायुक्त आयुक्त, शिमला और मंडी, नियमित प्रशासनिक कार्यों के अलावा, राजस्व मामलों के बोझ (Overburdened) से दबे हुए हैं और उनके पास इन मामलों पर निर्णय लेने के लिए समय नहीं है। अदालत ने पाया कि ऐसी परिस्थितियों में, दावेदारों और उनके वकीलों को इधर-उधर दौड़ना पड़ता है और प्राधिकारी द्वारा निर्णय के लिए काफी समय तक इंतजार करना पड़ता है। जब निर्णय नहीं दिया जाता है, तो असहाय दावेदारों के पास अदालत का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है।
चार हफ्ते में दाखिल करें एक्शन टेकन रिपोर्ट
न्यायालय ने कहा कि यह मुद्दा वास्तव में बेहद गंभीर है और इसलिए, सभी हितधारकों, विशेष रूप से एनएचएआई और केंद्र सरकार द्वारा इस पर विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है। न्यायालय ने याचिकाओं में मध्यस्थता कार्यवाही पूरी करने का समय 28 फरवरी 2024 तक बढ़ा दिया। कोर्ट ने भारत के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल, हिमाचल प्रदेश को चार सप्ताह के भीतर इस आदेश के आधार पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

