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दफ्तर से निकलकर सीधे स्कूलों में पहुंचे HPBOSE अध्यक्ष डॉ. राजेश, छात्रों और शिक्षकों से जाना जमीनी हाल
HPBOSE: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी व छात्र-केंद्रित बनाने के लिए बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा अब सीधे एक्शन मोड में आ गए हैं। दफ्तरों में बैठकर नीतियां बनाने की पारंपरिक शैली को दरकिनार करते हुए, उन्होंने शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानने के लिए सीधे स्कूलों का रुख किया है। इसी कड़ी में डॉ. शर्मा ने नगरोटा बगवां के विद्यालयों का दौरा कर विद्यार्थियों और शिक्षकों से सीधा संवाद स्थापित किया और व्यवस्था में सुधार के लिए उनसे बेबाक फीडबैक लिया।
छात्रों की समस्याएं सुनीं, तैयारियों का लिया जायजा
बोर्ड अध्यक्ष ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (बाल), नगरोटा बगवां तथा ग्रीन लैंड सीनियर सेकेंडरी स्कूल का विस्तृत दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों के बीच जाकर उनकी पढ़ाई, आगामी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों और उन्हें पेश आ रही कठिनाइयों पर खुलकर चर्चा की। डॉ. शर्मा ने छात्रों की समस्याओं और अपेक्षाओं को ध्यानपूर्वक सुनते हुए स्पष्ट किया कि भविष्य में बोर्ड के हर निर्णय और व्यवस्था के केंद्र में केवल विद्यार्थी ही होंगे। उन्होंने छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें पूरे आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया।
शिक्षकों के फीडबैक से सुधरेगी मूल्यांकन व्यवस्था
विद्यार्थियों के साथ-साथ डॉ. शर्मा ने शिक्षकों के साथ भी अहम बैठक की। उन्होंने परीक्षा के संचालन, उत्तर पुस्तिकाओं की मूल्यांकन व्यवस्था, पाठ्यक्रम से जुड़े विषयों और स्कूल स्तर पर आ रही व्यावहारिक समस्याओं की विस्तार से जानकारी ली। शिक्षकों को संबोधित करते हुए बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा का असल ढांचा शिक्षक ही तैयार करते हैं, इसलिए उनके अनुभव और सुझाव बोर्ड के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। इन्हीं सुझावों के आधार पर वर्तमान व्यवस्था की खामियों को दूर किया जाएगा।
औपचारिक निरीक्षण नहीं, सुधार की है ठोस पहल
अपने इस दौरे का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए डॉ. राजेश शर्मा ने कहा, “शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर कार्यालय में बैठकर नहीं, बल्कि विद्यालयों में पहुंचकर ही समझी जा सकती है।” उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह दौरा कोई औपचारिकता या रूटीन निरीक्षण नहीं है, बल्कि बोर्ड की नीतियों को जमीनी स्तर पर लागू करने में आ रही चुनौतियों को समझने का एक माध्यम है।
इस जमीनी फीडबैक के जरिए हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड को भविष्य में अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और संवेदनशील बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि बोर्ड अध्यक्ष द्वारा स्कूलों और बोर्ड के बीच सीधा संवाद स्थापित करने की यह पहल शिक्षा प्रणाली में दूरगामी और सकारात्मक बदलाव लाएगी।
अमित महाजन
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