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इस गांव में बेटी के जन्म पर लगाए जाते हैं 111 पेड़, यहां पढ़ें कारण

बेटियों के भविष्य को किया जाता है सुरक्षित

इस गांव में बेटी के जन्म पर लगाए जाते हैं 111 पेड़, यहां पढ़ें कारण

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राजस्थान के जिला राजसमंद के पिपलांत्री गांव के पूर्व सरपंच श्याम सुंदर पालीवाल ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक अलग मिसाल पेश की है। पूर्व सरपंच द्वारा गांव में ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने के लिए एक नवाचार किया गया है, जिसके तहत गांव में बेटी के जन्म पर 111 पौधे लगाए जाते हैं।

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पूर्व सरपंच श्याम सुंदर पालीवाल (Shyam Sundar Paliwal) का जन्म 9 जुलाई, 1967 गांव छोटी मोरवड में हुआ था। पालीवाल की गांव में थोड़ी बहुत खेती और छोटा सा संगमरमर का बिजनेस है। सरपंच बनने के पहले से ही उनको कई सरकारी योजनाओं की जानकारी थी। उनके मन में इच्छा होती थी कि वे सरपंच बन कर अपने गांव में उन योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करेंगे। बता दें कि पूर्व सरपंच पालीवाल ने पिपलांत्री गांव को एक आदर्श ग्राम के रूप में विकसित कर दिया है। उनकी कई योजनाओं को आधार बनाकर केंद्र सरकार पूरे देश में कई योजनाएं चला रही है।

साल 2005 में बने सरपंच

श्याम सुंदर पहली बार 4 फरवरी, 2005 में पिपलांत्री के सरपंच बने। साल 2006 में उनकी बेटी की अचानक मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने उसकी याद में एक पेड़ लगाया और फिर उनके में ये विचार आया कि गांव में हर बेटी के जन्म पर 111 पेड़ लगाए जाएंगे। 12वीं तक की पढ़ाई करने वाले श्याम सुंदर पालीवाल के कामों को देखते हुए महात्मा ज्योति राव फूले यूनिवर्सिटी, जयपुर और रामनारायण बजाज यूनिवर्सिटी, बीकानेर ने उनको डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है। अब इस समय उनकी पत्नी अनीता पालीवाल पिपलांत्री की सरपंच हैं।

बेटियों के लिए किया ये काम

जानकारी के अनुसार, पिपलांत्री में हर बेटी के जन्म पर 111 पेड़ लगाए जाते हैं। इसके अलावा गांव में किसी के घर बेटी हो तो गांव वाले आपस में चंदा इकट्ठा करके उस बेटी के नाम डाकखाने में फिक्स डिपाजिट करवा देते हैं। पूर्व सरपंच पालीवाल का कहना है कि ऐसा करने से भविष्य में बेटियों को आर्थिक रूप से कोई तंगी नहीं रहती है और वे परिवार पर बोझ भी नहीं बनती हैं।

दिया ये नारा

बताया जाता है कि पहली बार 2005 में सरपंच बनते ही श्याम सुंदर पालीवाल ने नारा दिया कि खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से ये पूछे बता तेरी रजा क्या है। पालीवाल का कहना था कि हर योजना बनाने से पहले सरकार को गांव के लोगों से पूछना चाहिए कि वे क्या करना चाहते हैं?

लिया ऐसा फैसला

सरपंच बनने के बाद पालीवाल ने तय किया वे भ्रष्टाचार को खत्म कर देंगे। उन्होंने तय किया कि वे घर से पंचायत भवन खाली हाथ जाएंगे और पंचायत भवन से घर खाली हाथ ही लौटेंगे। उनका मानना था कि ऐसा करने से पंचायत के फंड का लीकेज रोकने में मदद मिलेगी।

पेड़ लगवाने किए शुरू

जानकारी के अनुसार, पिपलांत्री गांव में लगातार 7 साल तक सूखा पड़ा था। जिसे देखते हुए उन्होंने सरपंच बनते ही गांव में पेड़ लगवाने शुरू कर दिए और तालाब व बारिश का पानी रोकने के लिए चेक डैम भी बनवाए। इसके बाद जब बारिश हुई तो सारा पानी गांव में रुका और गांव में भूजल स्तर बढ़ने लगा। जिसके बाद पालीवाल ने कई बोरिंग करवाकर स्वजल धारा योजना का लाभ उठाया।

हर घर नल का जल

बता दें कि पालीवाल ने अपनी पंचायत में हर घर नल का जल साल 2005 में ही पहुंचा दिया था। उस वक्त सरकार की योजना थी कि स्वजल धारा में 10 फीसदी पैसे ग्रामीण देंगे और 90 फीसदी सरकार देगी। जिसके बाद पालीवाल ने हर घर के लिए ग्राम पंचायत से पैसा जमा करवा दिया। इस तरह पीएम अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में स्वजलधारा योजना को धरातल पर उतार दिया गया। आजकल इस योजना को हर घर नल का जल योजना कहा जाता है। सरपंच पालीवाल की इस पहल से गांव की पानी की समस्या काफी हद तक सुलझ गई।

बनवाया एयर कंडीशन पंचायत भवन

पालीवाल ने पूरे देश में पहला एयर कंडीशन पंचायत भवन बनवाया, जहां महिलाओं और पुरुषों को बैठने के लिए बेहतर फर्नीचर, टॉयलेट और किचन था। इसमें सरपंच के सचिव को रहने के लिए क्वार्टर और अच्छा गेस्ट हाउस भी था। इसके अलावा पंचायत आपके द्वार कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम में पंचायतों की रात्रिकालीन सेवा शुरू की गई, जिसमें सभी सरकारी कर्मचारी महीने में 4 दिन पंचायत भवन पर रुकते थे और रात में ग्रामीणों की समस्याओं को सुनकर उनका हल निकालते थे। इसी कार्यक्रम को बाद में केंद्र सरकार ने पूरे देश में राजीव गांधी सेवा केंद्र के नाम से लागू किया।

ग्रामीणों को दिया रोजगार

पालीवाल के कामों से लोगों में उनका भरोसा जग गया। उन्होंने जल, जंगल, जमीन, गोचर भूमि और बेटियों को सुरक्षित करने का नारा दिया, जिससे गांव में खुशहाली आई। जंगल बढ़ने से वन्यजीव और पशु-पक्षी गांव में आने लगे और पेड़ लगाने से रोजगार बढ़ा। उन्होंने बांस, आंवला, एलोवेरा, आम, जामुन, नीम, शीशम, बरगद, पीपल जैसे पेड़ लगवाए। अब तक पिपलांत्री गांव में 4 लाख पौधे लग चुके हैं और ये इलाका पूरी तरह से हरा-भरा हो चुका है।

कई मोर्चों पर किया काम

पालीवाल ने गांव में कोई नया स्कूल नहीं खोला, बल्कि पहले से मौजूद सभी सरकारी स्कूलों को बेहतरीन स्कूलों में बदल दिया। अब इन स्कूलों में बच्चों को अच्छी शिक्षा हासिल होती है। इसके अलावा पिपलांत्री में जल संरक्षण किया गया, जिससे कुओं में पानी बढ़ा और इससे खेती में भी सुधार हुआ। उन्होंने किसानों को समझा-बुझाकर खेतों तक चकरोड बनवाए और ये सारा काम मनरेगा के तहत किया गया। इसके अलावा उन्होंने गांव में एक बड़ी नर्सरी बनवाई, जहां गांव की महिलाओं ने खुद पौधे तैयार करती हैं और इन फलदार पौधों को किसानों को बहुत कम दाम में बेचा जाता है।

नस्ल सुधार के लिए लिया फैसला

पालीवाल ने पशुपालन पर भी ध्यान दिया। उन्होंने अपने गांव में ये फैसला करवाया कि कोई भी अगर किसी गाय को सीमन लगवाएगा तो वो गिर गाय का होगा और अगर भैंस को सीमन लगवाएगा तो मुर्रा भैंस का होगा। इससे उनके गांव के पशुओं की नस्ल सुधरी। इसी के चलते आज इस गांव में गिर गायों की बहुलता है और मुर्रा नस्ल की भैंसे भी बहुत हो गई हैं, जिससे किसानों को ज्यादा दूध मिल रहा है और उनकी माली हालत में भी सुधार हुआ है।

पिपलांत्री होगा टूरिस्ट विलेज

गौरतलब है कि पालीवाल ने कई दूरगामी फैसले किए हैं। अब वे अपने गांव को टूरिस्ट विलेज बनाना चाहते हैं। उनका कहना है कि इससे गांव के लोगों को रोजगार मिलेगा और बाहर से लोग उनके गांव को देखने आएंगे।

मिले कई पुरस्कार

पूर्व सरपंच पालीवाल ने साल 2007 में ही अपने गांव को खुले में शौच से मुक्त करवा दिया था और इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से स्वच्छता पुरस्कार भी मिला था। इसके अलावा वृक्षारोपण और बेटियों की सुरक्षा के लिए किए गए कामों से भी उनको कई पुरस्कार मिले हैं। वहीं, 2021 में पिपलांत्री के पूर्व सरपंच पालीवाल को पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया है।

पिपलांत्री के पूर्व सरपंच श्याम सुंदर पालीवाल का कहना है कि अपने गांव को आदर्श गांव बनाने के लिए उन्होंने कड़ी तपस्या की है और इसको वह लगातार जारी रखेंगे। उनकी इच्छा है कि उनके गांव और पूरे देश का किसान प्राकृतिक और जैविक खेती करें और जहरयुक्त खेती से छुटकारा हासिल करे।

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