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मनोहर गोल्ड टी: एक लाख रुपए किलो बिकने वाली ये चाय क्यों है इतनी खास
हममें से बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिनका सुबह चाय के साथ शुरू होती है। चाय के शौकीनों के लिए एक खबर ये भी है कि असम के एक बागान की चाय 99,999 रुपये प्रति किलोग्राम में नीलाम हुई। अगर आपने नाम नहीं सुना तो हम बताते हैं इन चाय का नाम है मनोहर गोल्ड टी । यह चाय अपने खास स्वाद के लिए जानी जाती है। इसकी सुगंध और कलर भी स्वाद की ही तरह बेहद मनमोहक है। इसे बनाने के लिए चाय की पत्ती में गोल्डेन टिप का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद यह बेहद मुलायम हो जाती है। इस चाय के लिए हर साल बोली लगाई जाती है और इस साल यह चाय 99,999 रुपये प्रति किलोग्राम में बिकी है और थोक व्यापारी सौरभ टी ट्रेडर्स ने इस चाय को खरीदा है। इस चाय की नीलामी गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र (GTAC) में हुई है। यह इसकी अब तक की सबसे ऊंची कीमत है जबकि पिछले साल 75,000 रुपये प्रति किलो पर इसकी नीलामी की गई थी। अब आप सोच रहे होंगे कि मनोहारी गोल्ड टी इतनी खास क्यों है जो हर साल इतने ऊंचे दामों में बेची जाती है।

सबसे पहले साल 2018 में इस चाय ने सुर्खियां बटोरी थी, जब इसे 39 हजार रुपये प्रति किलोग्राम में बेचा गया था. इसके बाद इस चाय को दुनियाभर में पॉपुलेरिटी मिली थी। मनोहारी टी स्टेट के डायरेक्टर राजन लोहिया के मुताबिक, यह विशेष किस्म की चायपत्ती है जो अपनी खास सुगंध के लिए भी फेमस है। पैदावार के दौरान इसकी देखरेख का खास ध्यान रखा जाता है। इस में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, इसके अलावा इनमें ऐसे बायोएक्टिव कम्पाउंड्स होते हैं जो बढ़ती उम्र के असर और मोटापे को कंट्रोल करने में मदद करते है।

यह अपनी इस चाय की पत्ती को तोड़ने का तरीका भी अलग है. इसे सुबह 4 से 6 बजे बीच सूरज की किरणें पड़ने से पहले ही तोड़ा जाता है। इसका रंग हल्का मटमैला होता है। इन्हें कलियों के साथ तोड़ा जाता है। फर्मेंटेशन की प्रक्रिया से गुजारने के बाद इनका रंग मटमैले से ब्राउन हो जाता है। फिर इन्हें सुखाया जाता है जिसके बाद ये सुनहरे रंग की दिखाई देती हैं।
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विशेषज्ञ कहते हैं, दुर्जभ प्रजाति की होने के कारण स्वाद और न्यूट्रिएंट्स इसकी पहचान हैं। इसके कारण इसकी डिमांड बढ़ती जा रही है। यह चाय नीलामी में हर साल रिकॉर्ड बना रही है। सौरभ टी ट्रेडर्स के सीईओ एमएल माहेश्वरी ने बताया कि इस चाय की मांग दुनियाभर में बहुत ज्यादा है। इसकी मांग अधिक होने और उत्पादन बहुत कम होने की वजह से इसकी कीमत इतनी ज्यादा है। सौरभ टी ट्रेडर्स के सीईओ ने बताया कि वह इस चाय को खरीदने की लंबे समय से कोशिश कर रहे थे। जब इसके लिए वह बगीचे के मालिक के पास पहुंचे थे तो उन्होंने इसे निजी तौर पर बेचने से मना कर दिया था। चाय बागान के मालिक ने कहा था कि इस चाय को वह नीलामी में ही बेचेंगे। इसके बाद हमने चाय को 99,999 रुपये की बोली लगाकर खरीदा।
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