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हाईकोर्ट ने कालका- शिमला फोरलेन कार्य में तैनात प्रोजेक्ट डायरेक्टर की रिलीविंग पर लगाई रोक
हिमाचल हाईकोर्ट (Himachal High Court)ने कालका- शिमला फोरलेन निर्माण कार्य में तैनात प्रोजेक्ट डायरेक्टर की रिलीविंग पर रोक( Stay on relieving of project director)लगा दी है। एनएचएआई ने उनका तबादला फोरलेन के निर्माणाधीन होते हुए किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश विरेंदर सिंह खंडपीठ ने अदालत की अनुमति के बिना निदेशक को रिलीव ना करने के आदेश पारित किए है।
निदेशक को स्थानांतरित किया जाना जनहित में नहीं
कालका- शिमला फोरलेन निर्माण( Kalka-Shimla four lane construction) से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के पश्चात हाईकोर्ट ने उपरोक्त आदेश पारित किए। कोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड के दृष्टिगत पाया कि निदेशक की निगरानी में फोरलेन निर्माण कार्य सराहनीय रहा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट को जानकारी दी कि कालका- शिमला फोरलेन निर्माण के प्रोजेक्ट निदेशक राम अरसा खुरल का तबादला कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि राम अरसा खुरल की अगुवाई में ना केवल फोरलेन से अवैध कब्जे हटाए गए बल्कि, निर्माण कार्य में तेजी भी आई है। ऐसे में निदेशक को स्थानांतरित किया जाना जनहित में नहीं है। कोर्ट ने कहा कि निदेशक को यह जानकारी भी है कि फोरलेन के तेज निर्माण के लिए क्या- क्या आवश्यक कदम उठाए जाने है। यही नहीं, यह फोरलेन शिमला के लिए जीवन रेखा है।
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पर्यटन सीजन में एनएचआई की ओर से इस तरह के तबादला आदेश पारित किए जाने अपेक्षित नहीं है। डीसी सोलन ने रिपोर्ट के माध्यम से अदालत को बताया कि कंडाघाट के समीप दो बिस्वे अवैध कब्जे को हटा दिया गया है। अदालत ने नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ( National Highway Authority)को आदेश दिए कि वह अपनी संपत्ति के संरक्षण के लिए बैरिकेड लगाने के लिए स्वतंत्र है। इससे ना केवल संपत्ति की सुरक्षा होगी बल्कि वाहन दुर्घटना का खतरा भी कम होगा।






