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पंचतत्व में विलीन हुए मेजर विजय सिंह मनकोटिया, बैंड-बाजे के साथ निकली अंतिम यात्रा; उमड़ा जनसैलाब
Major Vijay Singh Mankotia : हिमाचल प्रदेश के कद्दावर नेता, दो बार के पूर्व मंत्री और शाहपुर से पांच बार विधायक रहे मेजर विजय सिंह मनकोटिया आज पंचतत्व में विलीन हो गए। उनकी अंतिम यात्रा पूरे सम्मान और बैंड-बाजे के साथ निकाली गई, जिसमें उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। विदेश से लौटे उनके बेटे ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।
विदेश से लौटे बेटे-बेटी, तियारा बाजार रहा बंद
87 वर्षीय मेजर मनकोटिया का मंगलवार को कांगड़ा के तियारा में हार्ट अटैक से निधन हो गया था। उनके बेटे और बेटी के विदेश से लौटने के बाद ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। पार्थिव देह को अंतिम दर्शनों के लिए उनके पैतृक आवास पर रखा गया था। उनके सम्मान में आज तियारा बाजार भी पूरी तरह से बंद रहा।

सेना से राजनीति तक का सफर और बेबाक अंदाज
राजनीति में आने से पहले मेजर मनकोटिया भारतीय सेना में एक अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति का रुख किया। अपनी सैन्य पृष्ठभूमि के चलते वे अपनी स्पष्टवादिता और बेबाक अंदाज के लिए हमेशा पहचाने गए। वे पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए काम करने वाले संगठनों में भी जीवन भर सक्रिय रहे।
4 दशक का शानदार सियासी सफर
मेजर मनकोटिया ने हिमाचल की राजनीति में लगभग 40 सालों तक सक्रिय भूमिका निभाई। उनका राजनीतिक सफर 1982 में शाहपुर से निर्दलीय विधायक के तौर पर शुरू हुआ था। इसके बाद वह 1985 में कांग्रेस, 1990 में जनता दल, 1993 में फिर कांग्रेस और 2003 में शाहपुर से विधायक चुने गए। अपने सियासी सफर में उन्होंने कांग्रेस, जनता दल, बसपा और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भी चुनाव लड़ा। वह 1995 और 2003 में राज्य सरकार में मंत्री रहे और उन्होंने पर्यटन, नागरिक उड्डयन व कानून जैसे अहम विभागों का जिम्मा संभाला। इसके अलावा वे हिमाचल पर्यटन विकास निगम के उपाध्यक्ष भी रहे।
वीरभद्र सिंह से टकराव और सरवीण चौधरी से रहा चुनावी मुकाबला
हिमाचल की सियासत में मेजर मनकोटिया का नाम पूर्व सीएम दिवंगत वीरभद्र सिंह के साथ उनके राजनीतिक टकराव के लिए सबसे ज्यादा चर्चित रहा। दोनों नेताओं के बीच कई मौकों पर तीखे मतभेद खुलकर सामने आए। वहीं, शाहपुर की स्थानीय राजनीति में पूर्व मंत्री सरवीण चौधरी के साथ उनका लंबा चुनावी मुकाबला रहा। 2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में सरवीण चौधरी ने उन्हें शिकस्त दी थी। 2017 में मनकोटिया निर्दलीय मैदान में उतरे थे और दूसरे स्थान पर रहे थे, हालांकि बाद में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच दोनों नेता एक ही मंच पर भी नजर आए थे।
राहुल कुमार
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