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नूरपुर नगर परिषद: 26 दिन के सियासी ड्रामे और ‘ऑपरेशन लोटस’ की अटकलों के बीच नीति महाजन बनीं अध्यक्ष
Nurpur Nager Parishad: चुनाव परिणाम आने के करीब 26 दिन बाद आखिरकार नूरपुर नगर परिषद को अपना नया नेतृत्व मिल गया है। तमाम राजनीतिक उठापटक, ‘ऑपरेशन लोटस’ की चर्चाओं और एफआईआर (FIR) तक पहुंचे हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद, कांग्रेस ने एकजुटता दिखाते हुए अपना अध्यक्ष बना लिया है। कांग्रेस समर्थित नीति महाजन को नगर परिषद का अध्यक्ष और सोनिया सोगा को उपाध्यक्ष चुना गया है। इस नियुक्ति के साथ ही शहर में पिछले लगभग एक महीने से चला आ रहा सियासी गतिरोध समाप्त हो गया है।

बहुमत के बावजूद कहां फंसा था पेंच?
हाल ही में संपन्न हुए नगर परिषद चुनावों में कुल 9 वार्डों में से 6 पर कांग्रेस समर्थित पार्षदों ने शानदार जीत दर्ज की थी। स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद कांग्रेस खेमे में भारी उत्साह था और तय माना जा रहा था कि अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव आसानी से हो जाएगा।
अध्यक्ष पर सहमति, उपाध्यक्ष पर रार
अध्यक्ष पद तो लगभग तय था, लेकिन उपाध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस पार्षदों और नेताओं के बीच अंदरूनी खींचतान शुरू हो गई, जिससे बहुमत होने के बावजूद परिषद का गठन लटक गया।
‘ऑपरेशन लोटस’ की चर्चा और 11 जून का विवाद
कांग्रेस के भीतर चल रही इस गुटबाजी का फायदा उठाने के लिए विपक्षी दल बीजेपी भी पूरी तरह सक्रिय हो गया था। राजनीतिक गलियारों में लगातार “ऑपरेशन लोटस” (पार्षदों को तोड़ने की कवायद) की सुगबुगाहट तेज हो गई। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर पहुंच गया।
सड़क से थाने तक पहुंचा विवाद
24 दिनों के इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच 11 जून की सुबह स्थिति बेकाबू हो गई। कांग्रेस और बीजेपी समर्थकों के बीच तीखा विवाद हुआ, जिसने इतना तूल पकड़ा कि मामला पुलिस थाने पहुंच गया।हालात इतने बिगड़ गए कि दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ थाने में क्रॉस एफआईआर (Cross FIR) दर्ज करवाई गई।
दबाव में काम आई एकजुटता
विपक्षी दल की सक्रियता और थाने तक पहुंचे विवाद ने आखिरकार कांग्रेस आलाकमान और स्थानीय नेताओं को सचेत कर दिया। बीजेपी की सेंधमारी के डर और राजनीतिक किरकिरी से बचने के लिए सभी कांग्रेस समर्थित पार्षदों ने आपसी गिले-शिकवे भुला दिए।एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए सभी 6 पार्षदों ने नीति महाजन (अध्यक्ष) और सोनिया सोगा (उपाध्यक्ष) के नाम पर मुहर लगा दी।
अब विकास की उम्मीद
राजनीतिक पंडित इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस खेमे की एकजुटता की जीत और बीजेपी की जोड़-तोड़ की राजनीति पर लगाम के रूप में देख रहे हैं। 26 दिन के इस लंबे ड्रामे के बाद अब नूरपुर की जनता को उम्मीद है कि नया नेतृत्व विवादों को पीछे छोड़कर शहर के रुके हुए विकास कार्यों और जनहित के मुद्दों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करेगा।
ऋषि महाजन

