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जिस उम्र में हाथ कांपने लगते हैं, ठीक से दिखाई नहीं देता, उस उम्र में अल्फी ने पेंगुइन्स के बुने स्वेटर
नई दिल्ली। सर्दियां आई नहीं की मां और दादी सब धूप सेंकने के लिए बरामदे और छत पर बैठ जाती हैं। और उनके हाथों में होता है, उन धागों का एक गेंद। जिसे वह कांटे से बुनने के लिए बैठ जाती है। और तब तक बैठी रहती हैं, जब तक सूर्य दक्षिणायन दिशा में जाकर डूबने को नहीं हो जाता है। हालांकि, हमारी और आपकी मां और दादी यह काम शौक से और बच्चों के लिए सर्दी के कपड़े तैयार करने के लिए करती हैं। मगर यही काम दूर देश ऑस्ट्रेलिया में एक बूढ़ा शख्स क्यूट से दिखने वाले पेंगुइन्स के लिए करता था। आज हम उसी बूढ़े इंसान की आपको कहानी बताने जा रहे हैं।
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इस बूढ़े आदमी का नाम है अल्फ्रेड डेट। जिन्हें उनके परिजन प्यार से अल्फी बुलाते थे। वह भले ही अब हमारे बीच न हो, लेकिन उन्होंने अपने शानदार कार्य से ये साबित किया कि ‘उम्र सिर्फ एक नंबर’ है। क्योंकि जिस उम्र में लोगों की नजरें धुंधली हो जाती हैं, उस उम्र में उन्होंने जिंदगी के बहुत से दिन मुश्किल से जूझते घायल पेंगुइन्स के लिए गर्म स्वेटर बनाकर गुजार दिए। अब उनकी यह कहानी अस्ट्रेलिया से वायरल होते हुए इंडिया पहुंची है। लोग उनके इस योगदान की भूरी-भूरी सराहना कर रहे हैं।
Just read about Australia’s oldest man. He’s called Alfie Dates, he’s 109 and he knits really lovely tiny sweaters for injured penguins. pic.twitter.com/Lc3uxNIzmW
— Lisa Allen (@LisaTheAllen) February 20, 2021
वहीं, उनकी तस्वीरों को साझा करते हुए एक ट्विटर यूजर @LisaTheAllen ने लिखा, ‘अभी ऑस्ट्रेलिया के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति के बारे में पढ़ा। उन्हें अल्फी डेट कहा जाता था, वह 109 साल के थे और घायल पेंगुइन्स के लिए प्यारे छोटे स्वेटर बुना करते थे। इस ट्वीट को खबर लिखे जाने तक 44 हजार से अधिक लाइक्स और 6 हजार से ज्यादा रीट्वीट मिल चुके हैं।अल्फी को पता चल चुका था कि बुनाई उनका शौक है। ऐसे में ‘फिलिप आइलैंड नेचर पार्क’ की ओर से दो नर्सों ने उनसे संपर्क किया और पेंगुइन्स के लिए स्वेटर बुनने की बात की। फिलिप द्वीप पर तेल रिसाव के कारण 483 छोटे पेंगुइन को रिहैबिलेशन सेंटर लाया गया, जिनमें से 96 प्रतिशत को वापस जंगल में छोड़ दिया गया।
वहीं, बताया जाता है कि जब 2001 में तेल रिसाव आपदा (ऑयल स्पिल डिजास्टर) आई, तो फिलिप आईलैंड नेचर पार्क में वाइल्डलाइफ क्लिनिक सैकड़ों हाथ से बुने छोटे स्वेटर के साथ तैयार था। फिर साउथ वेस्ट ऑस्ट्रेलिया में एक केयर होम में शिफ्ट होने के बाद अल्फी ने ‘सिम्पल सिंगल-रिब और डबल-रिब स्वेटर’ बुनना शुरू किया। इस संकट से निपटने के बाद सेंटर को पेंगुइन के लिए और स्वेटर की जरूरत नहीं थी। लेकिन सच तो यह है कि अल्फी की बदौलत ही इन प्यारे और छोटे पेंगुइन्स की जान बच सकी। उनके इस योगदान को प्रकृति और क्यूट पेंगुइन्स कभी नहीं भूल सकते। अफसोस साल 2016 में प्यारे अल्फी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
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