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अनंत यात्रा पर निकले हिमाचल के हरदिल अजीज नेता, अंतिम दर्शनों के लिए उमड़ा हुजूम

राजपरिवार ने तीन दिन से ग्रहण नहीं किया अन्न

अनंत यात्रा पर निकले हिमाचल के हरदिल अजीज नेता, अंतिम दर्शनों के लिए उमड़ा हुजूम

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शिमला। हिमाचल प्रदेश के छह बार सीएम वीरभद्र सिंह (Virbhadra Singh) अंतिम सफर पर निकल पड़े हैं। उनका अंतिम संस्कार (Funeral) जोगनी बाग रामपुर में होगा। पूर्व सीएम के निधन के बाद से राज परिवार के सदस्यों ने तीन दिनों से अन्न ग्रहण नहीं किया है। तीन दिनों से राज परिवार के सदस्य केवल फलों का ही सेवन कर रहे हैं। हिंदू परंपरा के अनुसार जब तक घर से पार्थिव देह को अंतिम संस्कार के लिए नहीं ले जाया जाता, तब तक घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। विक्रमादित्य सिंह ने राजतिलक के बाद जूस पिया। ऐसे में राज परिवार के लोगों ने भी इस परंपरा का निर्वहन किया।

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सीएम वीरभद्र सिंह का अंतिम संस्कार चंदन, शूर और सामान्य लकड़ी से किया जाएगा। वहीं, इस दौरान करीब 25 किलोग्राम देसी घी और कई किलोग्राम मेवे का भी प्रयोग किया जाएगा। जोबनी बाग में राज परिवार के लिए अलग से ही स्थान निर्धारित किया गया है। जहां पर केवल राज परिवार के लोगों का ही अंतिम संस्कार किया जाता है। जोगनी बाग (Jogni Bagh) में राज परिवार के पूर्वजों के स्मारक देखे जा सकते हैं, यहां पर केवल राज परिवार के सदस्यों का ही अंतिम संस्कार किया जाता है। यहां पर राजा वीरभद्र सिंह के पिता राजा पदम देव सिंह सहित अन्य परिवार के सदस्यों की भी समाधियां बनाई गई हैं।

अंतिम विदाई 12 मुखी बमाण पर

वीरभद्र सिंह की अंतिम विदाई 12 मुखी बमाण पर हुई है। बुशहर रियासत के किन्नौर, डंसा, लालसा, कूहल और अन्य क्षेत्रों के ‘बड़ई’ ‘ओड’ दो दिन से लगातार बमाण के निर्माण में जुटेथेष शुक्रवार सुबह से ही 7 बड़ई इस काम मे लगे हैं। उन्होंने कहा कि केवल राजा के परिवार के लिए ही 12 मुखी बमाण बनाया जाता है। जबकि राणा, ठाकुर और कुंवर के लिए 8 और 10 मुखी बमाण बनाए जाते हैं।इस बमाण को शुद्ध देवदार की लकड़ी से बनाया जाता है। जिसमें हाथी के जीभ निकले 12 मुख बनाए जाते हैं। साथ ही फूल और पत्तियों की नक्काशी की जाती है। वहीं आम लोगों के लिए सामान्य बमाण बनाए जाते हैं।

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