×

FRBM Act: भारद्वाज बोले- वीरभद्र सरकार की सुधारी गलती, नहीं तो होती कार्रवाई

बिना पढ़ें और बिना जाने विपक्ष कर रहा विरोध, सुर्खियों में रहने को कर रहा ऐसा

FRBM Act: भारद्वाज बोले- वीरभद्र सरकार की सुधारी गलती, नहीं तो होती कार्रवाई

- Advertisement -

शिमला। हिमाचल विधानसभा (Himachal Vidhan Sabha) में पास हुए हिमाचल प्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन संशोधन विधेयक 2021 (Himachal Pradesh FISCAL RESPONSIBILITY AND BUDGET MANAGEMENT AMENDMENT BILL 2021) के विरोध को लेकर सरकार ने विपक्ष को आड़े हाथ लिया है। यहां मीडिया से बातचीत में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज (Parliamentary Affairs Minister Suresh Bhardwaj) ने बताया कि यह संशोधन पुरानी गलती है, जोकि तत्कालीन वीरभद्र सिंह सरकार ने भी की है। हमने तो गलती को सुधारते हुए तुरंत संशोधन विधेयक विधानसभा में लाया है। सुरेश भारद्वाज ने कहा कि तत्कालीन वीरभद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन एक्ट की अवहेलना की है। अगर यह विधेयक विधानसभा में ना लाया जाता तो तत्कालीन सरकार के वित्त मंत्री, वित्त सचिव व अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती थी और मामला कैग (CAG) के पास जाता। उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि विपक्ष के कई वरिष्ठ लोग सरकार में रहे हैं। उन्होंने संशोधन विधयेक पढ़ा ही नहीं। उन्हें यह जानकारी ही नहीं है कि क्या संशोधन लाए हैं। बिना पढ़े और बिना सुने ही विरोध शुरू कर दिया। ऐसा होता कि विपक्ष सदन में इसको लेकर चर्चा करता और इसके बारे सुनता। मात्र सुर्खियां बनने के लिए वॉकआउट किया।


यह भी पढ़ें: Budget Session:कर्ज लेने की लिमिट बढ़ाने पर सदन से विपक्ष का वॉकआउट

 

 

क्या है हिमाचल प्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन

यह एक्ट राज्यों द्वारा लिए जाने वाले कर्ज की लिमिट से संबंधित विधेयक है। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि वर्ष 2005 में संसद में एफआरबीएम एक्ट (FRBM Act) यानी राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन एक्ट बना। सभी प्रदेशों को एक्ट बनाने के निर्देश दिए गए। इसके तहत सकल घरेलू उत्पाद का राजकोषीय घाटा तीन फीसदी से कम रहेगा। अगर किसी साल यह तीन फीसदी से अधिक हो तो संशोधन करना जरूरी होता है। 2012 में वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार थी। 2012-13, 13-14, 14-15 में यह तीन फीसदी की लिमिट से ज्यादा हो गया। 2012-13 में 3.60, 2013-14 में 4.23, 2014-15 में 4.05 फीसदी रहा। यह एफआरबीएम एक्ट की अवहेलना थी और संशोधन लाने की जरूरत थी। पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार (Congress Govt) ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन एक साल के लिए है। अगर किसी वर्ष लिमिट तीन फीसदी से अधिक रहती है तो उस वर्ष भी संशोधन करना जरूरी है। यानी की हर साल संशोधन करना होता है।

यह भी पढ़ें: Budget Session: एक साल में हिमाचल में 25 दवा कंपनियों के सैंपल हुए फेल

जयराम सरकार को क्यों पड़ी संशोधन की जरूरत

संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि बीजेपी सरकार (BJP Govt) में अब तक लिमिट से अधिक कर्ज नहीं लिया गया था, लेकिन, 2019-20 में केंद्र से कैंपा के तहत 1600 करोड़ रुपये आया। यह हिमाचल का पैसा होता है इसे खर्च कर सकते हैं। यह पैसा कर्ज में जमा होता है। इसके चलते लिमिट बढ़ गई। इसके चलते विधानसभा में संशोधन एक्ट लाया गया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने केंद्र की मंजूरी के बाद ही कर्ज लिया है। केंद्र ने कहा कि कर्ज ले सकते हैं, पर इसे विधानसभा में प्रूव करवाना पड़ेगा। इसके चलते संशोधन विधेयक लाना पड़ा। इसके साथ ही 2012-13, 2013-14, 2014-15 का भी सुधार करना पड़ा है।

हिमाचल और देश-दुनिया की ताजा अपडेट के लिए join करें हिमाचल अभी अभी का Whats App Group 

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है