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फिंगर प्रिंट से पकड़ लेती है पुलिस, अगर अंगुली जल जाए तो क्या होगा, यहां जानें

दुनिया में सभी का अलग-अलग होता है फिंगर प्रिंट, सबसे पावरफुल पासवर्ड

फिंगर प्रिंट से पकड़ लेती है पुलिस, अगर अंगुली जल जाए तो क्या होगा, यहां जानें

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आपने फिल्मों (Films)और सीरियल में देखा होगा कि पुलिस (Police) कैसे फिंगर प्रिंट के जरिए अपराधी तक पहुंच जाती है। आजकल मोबाइल (Mobile) में भी फिंगर सेंसर आ गए है। अंगुली लगाओ और फोन अनलॉक (Phone Unlock) हो जाता है। क्या आपको पता है दुनिया में जितने भी लोग हैं उनके फिंगर प्रिंट अलग-अलग होते हैं। किसी एक का भी मैच नहीं होता है। तभी तो फिंगरप्रिंट इतना पावरफुल होता है कि उसका इस्‍तेमाल पासवर्ड (Password) की तरह किया जाता है। ऑफिसेज में अटेंडेंस के लिए भी फ‍िंगरप्रिंट का इस्‍तेमाल किया जाता हैं।ऐसे में बड़ा सवाल है कि अगर हाथ जल जाए, एसिड गिर जाए या कोई घाव हो जाए तो क्‍या फिंगरप्रिंट बदल जाता है। एक इनसान का फ‍िंगरप्रिंट दूसरे इनसान से क्‍यों नहीं मैच करता और क्‍या यह जीवनभर बदलता रहता है, जानिए यहां इन सवालों के जवाब।पहला सवाल फ‍िंगरप्रिंट इतना यूनिक क्‍यों होता है, एक से दूसरे इनसान का फ‍िंगरप्रिंट कभी मैच क्‍यों नहीं करता है इस पर वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेविड एम कॉन्‍ली कहते हैं कि इसके पीछे कई फैक्‍टर जिम्‍मेदार होते हैं। जैसे इनसान के जीन्‍स, एन्‍वॉयर्नमेंट आदि। ऐसे कई फैक्‍टर तय करते हैं कि सबके फिंगरप्रिंट को क्‍यों अलग-अलग होते हैं।

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मां के पेट में ही बनने लगते हैं फिंगरप्रिंट

एक्‍सपर्ट कहते हैं, जब बच्‍चा गर्भ में पल रहा होता है, तभी से फिंगरप्रिंट तैयार होने की प्रॉसेस शुरू हो जाती है। इनसान की स्किन दो लेयर से मिलकर बनती हैं पहली. एपिडर्मिस, दूसरी.डर्मिस। यह दोनों साथ.साथ बढ़ती हैं। इनसान के जीन के मुताबिकए इन्‍हीं दोनों लेयर से तैयार होने वाली स्किन पर फिंगरप्रिंट के उभार बनने लगते हैं।

चोट लगने पर दोबारा आए जाते हैं फिंगरप्रिंट

विज्ञान कहता है कि उंगलियों में किसी तरह की दिक्‍कत होने पर फिंगरप्रिंट अगर गायब हो जाता है तो कुछ ही महीने के अंदर यह वापस उसी पोजिशन पर दिखने लगता है। जैसे. अगर किसी का हाथ जल जाए, उस पर एसिड गिर जाए या फिर घाव हो जाए तो करीब एक महीने के अंदर उसी जगह पर फिंगरप्रिंट को देखा जा सकता है।एक सवाल यह भी है कि क्‍या इंसान की उम्र के साथ उसके फिंगरप्रिंट में बदलाव आता है, विज्ञान कहता है कि कम उम्र में फिंगरप्रिंट में एक लचीलापन होता है, लेकिन जैसे-जैसे इनसान की उम्र बढ़ती है, यह लचीलापन खोने लगता है और यह सख्‍त होता जाता है, लेकिन फिंगरप्रिंट की संरचना में कोई बदलाव नहीं होता।

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