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दिवाली से ठीक एक दिन पहले क्यों होती है हनुमान जी की उपासना.. जानें श्रीराम और भगवान शिव से जुड़ा यह रहस्य
Diwali 2026: रोशनी और दीपों का महापर्व दीपावली इस वर्ष 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। पाँच दिनों तक चलने वाले इस दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है और इसका समापन भाई दूज के साथ होता है। इन पाँच दिनों में हर पर्व का अपना एक अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इन्हीं में से एक बेहद खास पर्व है छोटी दिवाली, जिसे नरक चतुर्दशी और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है।
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर घरों में दीप जलाने के साथ-साथ यमराज और भगवान हनुमान की उपासना की विशेष परंपरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिवाली से ठीक एक दिन पहले संकटमोचन हनुमान की पूजा क्यों की जाती है? आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक मान्यताओं और पूजन विधि के बारे में।
दिवाली से पहले क्यों की जाती है हनुमान जी की पूजा?
श्रीराम का वरदान: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे, तो उनके स्वागत में भव्य दीपोत्सव मनाया गया था। कहा जाता है कि भगवान श्रीराम ने हनुमान जी की अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि दिवाली से ठीक पहले उनकी पूजा की जाएगी। तभी से छोटी दिवाली पर हनुमान जी की उपासना की परंपरा चली आ रही है।
नकारात्मक शक्तियों से रक्षा: छोटी दिवाली को ‘काली चौदस’ भी कहा जाता है। इस दिन नकारात्मक और बुरी ऊर्जाओं का प्रभाव बढ़ने की मान्यता है। ऐसे में संकटमोचन हनुमान की पूजा करने से भय, रोग और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
कुछ जगहों पर हनुमान जन्मोत्सव: देश के कई हिस्सों—विशेषकर गुजरात और अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर—में इस दिन हनुमान जन्मोत्सव भी मनाया जाता है।
राम दरबार से पहले आशीर्वाद: हनुमान जी को भगवान श्रीराम का परम भक्त और द्वारपाल माना जाता है। इसलिए कई स्थानों पर राम दरबार या माता लक्ष्मी की पूजा करने से पहले हनुमान जी का स्मरण और आशीर्वाद लेने की परंपरा है।
भगवान शिव से क्या है हनुमान जी का खास संबंध?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी को भगवान शिव का 11वाँ रुद्रावतार माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव ने भगवान विष्णु के ‘राम अवतार’ की सेवा और भक्ति का आनंद लेने के लिए ही हनुमान जी के रूप में अवतार लिया था। यही वजह है कि हनुमान जी की उपासना करने से भगवान शिव की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
छोटी दिवाली पर ऐसे करें हनुमान जी की पूजा (पूजन विधि)
स्नान और शुद्धि: छोटी दिवाली की सुबह तिल के तेल से शरीर पर मालिश करने के बाद स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
प्रतिमा स्थापना: शुभ मुहूर्त में हनुमान जी की बाल रूप या वीर मुद्रा की प्रतिमा को एक साफ चौकी पर स्थापित करें।
पूजा सामग्री अर्पण: प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें लाल वस्त्र, जनेऊ, लाल चंदन, केसर, सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें।
भोग लगाएं: बजरंगबली को पान, पूआ या लड्डू का भोग लगाएं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर उनकी आरती करें।
मंत्र और पाठ: पूजा के दौरान श्रद्धापर्वक हनुमान चालीसा का पाठ करें और ‘ॐ श्री हनुमते नमः’ मंत्र का जाप करें।
पंकज शर्मा
