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हिमाचल: शातिर पति ने चाकू से पत्नी की हत्या को बताया भालू का हमला, ऐसे हुआ मामले का खुलासा
रामपुर बुशहर। हिमाचल की राजधानी शिमला में चाकू से पत्नी की हत्या (Murder) करने के आरोपी को अदालत ने उम्रकैद (Life Imprisonment ) की सजा सुनाई है। यह सजा अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय किन्नौर स्थित रामपुर की अदालत ने सुनाई है। अदालत ने दोषी को दो लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। रामपुर की अदालत ने सोमवार को अहम फैसला सुनाते हुए दोषी हरका बहादुर (मूलत: नेपाल), गांव रिहायश बठारा (सराहन बुशहर), तहसील रामपुर जिला शिमला को सजा सुनाई। बता दें कि आरोपी ने चाकू से पत्नी की हत्या (Wife Murder) करने के बाद नाटकीय तरीके से इसे भालू का हमला बताया था।
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मामले की जानकारी देते हुए उप जिला न्यायवादी किन्नौर स्थित रामपुर (Rampur) कमल चंदेल ने बताया कि तीन मईए 2018 को शाम करीब साढ़े सात बजे पुलिस चौकी सराहन में सूचना मिली कि गांव बठारा के जंगल में एक महिला और पुरुष को भालू ने नोच डाला है। पुलिस मौके पर पहुंची तो पाया कि एक महिला मृत अवस्था में पड़ी थी। लोगों से मालूम हुआ कि एक अन्य घायल व्यक्ति को इलाज के लिए सराहन अस्पताल ले गए हैं। महिला का पोस्टमार्टम सराहन अस्पताल करवाया गया। दोषी के मुताबिक भालू ने हमला करके उसकी पत्नी को मार दिया था और उसे घायल कर दिया था, जबकि पोस्टमार्टम में डाक्टर ने महिला के शरीर पर भालू (Bear) के पंजों और दांत के घाव ना होने की पुष्टि की। इसलिए शक के आधार पर शव को पोस्टमार्टम के लिए आइजीएमसी शिमला रेफर किया गया। आइजीएमसी शिमला में पोस्टमार्टम के बाद पाया गया कि मृत महिला के शरीर पर घाव के निशान किसी तेजधार हथियार के हैं, ना कि किसी जानवर के पंजे और दांत के।

जिस पर पुलिस थाना झाकड़ी ने आइपीसी की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया और हरका बहादुर को जांच में शामिल किया गया। पत्नी की हत्या करने में उसकी संलिप्तता पाई गई। मुकदमे की जांच के दौरान पाया गया कि दोषी पत्नी पर संदेह करता था, जिसके कारण इनकी नेपाल (Nepal) और बठारा में रहते हुए आपस में बहस होती रहती थी। दोषी ने सुनियोजित तरीके से पत्नी की चाकू से हत्या कर दी और चोटों के निशान शरीर में इस तरह से किए कि यह भालू के काटने का मामला लगे। तफ्तीश पूरी होने पर चालान को अदालत में पेश किया गया और ट्रायल के दौरान 18 गवाहों के साक्ष्य दर्ज किए गए। वैज्ञानिक और मेडिकल सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर हरका बहादुर को दोषी पाया। इस मामले की पैरवी जेल उपन्यायवादी कमल चंदेल ने की।
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