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दुनिया में सबसे ज्यादा खाए जाते हैं ये व्यंजन, पिज्जा -बर्गर के साथ ये भारतीय डिश भी शामिल
World Most Popular Dishes: खाना लोगों को जोड़ता है। यह सिर्फ एक भोजन से कहीं बढ़कर है—यह कहानियों, यादों और परंपराओं का एक अनूठा संगम है। खाने के मामले में सभी की अपनी – अपनी पसंद है। भारतीय व्यंजनों की बात ही निराली है। बहुत सारे व्यंजन ऐसे हैं जो सभी जगह पसंद किए जाते हैं। कुछ इतने मशहूर हो चुके हैं कि अब यह दुनिया के लगभग हर कोने में पसंद किए जाते हैं। इन में कुछ भारतीय व्यंजन भी शामिल हैं। चलिए आप को बताते हैं सभी डिशेज के बारे में जो ग्लोबल लेवल पर फूड चार्ट में आती हैं…
दुनिया में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली डिश पिज्जा
पिज्जा को दुनिया में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली डिश माना जाता है। इसकी वैरायटी क्लासिक चीज से लेकर खास टॉपिंग तक इसे सबका पसंदीदा बनाती है। चाहे न्यूयॉर्क हो, दिल्ली हो या फिर टोक्यो पिज्जा हर कल्चर में एक पसंदीदा खाना बन गया है। दक्षिणी इटली में स्थित, नेपल्स वह जगह है।जिसे दुनिया की पिज़्ज़ा राजधानी” कहा जाता है, यहां 18वीं सदी में आधुनिक पिज़्ज़ा की शुरुआत हुई थी।
युवाओं से लेकर बच्चों तक की पहली पसंद बर्गर
बर्गर’ आधुनिक जीवनशैली में फास्ट फूड का ऐसा प्रयाय बन गया है जो घर से बाहर निकलने पर युवाओं से लेकर बच्चों तक की पहली पसंद बन जाता है। बर्गर एक और ग्लोबल डिश है।अपनी आसानी और स्वाद के लिए मशहूर यह दुनिया भर की फास्ट फूड चेन पर राज करता है। इसकी अलग-अलग तरह से बनने की खासियत ने इसे अलग-अलग तरह के लोगों तक पहुंचने में मदद की है। ‘बर्गर’ सबसे पहले रोम में पहली शताब्दी में बना था।यह ‘आइसिसिया ओमेंटेटा’ व्यंजन के तौर पर बनता था। ‘आइसिसिया ओमेंटेटा’ ही ‘हैमबर्गर’ से मिलता-जुलता पहला पकवान था। यह कीमा, काली मिर्च, बादाम और वाइन के साथ ही मछली के सॉर्स में तैयार होता था।
सुशी जापान की पारंपरिक डिश
इसी तरह टैकोस अपने तेज स्वाद और अपनी पसंद की फिलिंगस के लिए दुनिया भर में मशहूर है। सुशी जापान की पारंपरिक डिश है। लेकिन अब यह इंटरनेशनल फाइन डायनिंग का एक जरूरी हिस्सा बन चुकी । सुशी का विचार बौद्ध धर्म के साथ जापान में आया, संभवतः चीन से, जिसने जापान को लेखन प्रणाली, खगोल विज्ञान और केंद्रीकृत सरकार जैसी अवधारणाएँ भी प्रदान कीं। जापान में सुशी का इतिहास नौवीं शताब्दी में इन बौद्ध यात्रियों के आगमन से शुरू होता है। टैकोस एक पारंपरिक मेक्सिकन व्यंजन है, जो कॉर्न या गेहूं की टॉर्टिला (रोटी) में मसालेदार स्टफिंग भरकर बनाया जाता है। इसमें आम तौर पर भुना हुआ मांस, सीफूड, या वेजीटेरियन फिलिंग (जैसे बीन्स, पनीर, या सब्जियां) का उपयोग होता है, जिसे साल्सा, एवोकाडो और सलाद के साथ परोसा जाता है। इसे घर पर रोटी या गेहूं के आटे से आसानी से कुरकुरा बनाया जा सकता है।
भारत की डिश बटर चिकन
बटर चिकन शायद भारत की दुनिया भर में सबसे ज्यादा पहचानी जाने वाली डिश । इसकी क्रीमी ग्रेवी और हल्के मसालों ने इसे UK, USA और कनाडा जैसे देशों में मशहूर बना दिया है।एक ऐसा व्यंजन है जो इतना लोकप्रिय है कि अब यह दुनिया भर के भारतीय रेस्तरां के मेनू में आसानी से मिल जाता है। लेकिन इसकी शुरुआत बचे हुए खाने का इस्तेमाल करने के एक तरीके के रूप में हुई थी। परंपरागत रूप से, इस व्यंजन की शुरुआत तंदूरी चिकन से होती थी-हड्डी सहित मांस को जीरा, धनिया, हल्दी, मिर्च और गरम मसाले में लपेटकर तंदूर (मिट्टी के गर्म ओवन) में आंशिक रूप से पकाया जाता था, और फिर दूसरी बार तंदूर में तेज़ आंच पर पकाया जाता था।
सबसे ज्यादा ऑर्डर की जाती है बिरयानी
बिरयानी दुनिया भर में सबसे ज्यादा ऑर्डर की जाने वाली चावल की डिश में से एक है। इसे इसकी शानदार खुशबू और कई तरह के मसालों के लिए पसंद किया जाता है। वहीं समोसा एक आम स्ट्रीट स्नैक से बदलकर दुनिया भर का पसंदीदा स्नैक बन चुका है। बिरयानी का इतिहास मुख्य रूप से फारस (आधुनिक ईरान) और भारत के मुगलकालीन शाही रसोइयों से जुड़ा है। यह शब्द फारसी शब्द “बिरिंज बिरियां” (तलने से पहले चावल) से आया है, जो चावल, मांस और मसालों का एक मिश्रित व्यंजन है। माना जाता है कि इसे मुगल बादशाह शाहजहाँ की बेगम मुमताज़ महल ने एक संतुलित भोजन के रूप में विकसित किया था, जो बाद में अवध (लखनऊ) और हैदराबाद के निजामों के संरक्षण में भारत के सबसे लोकप्रिय व्यंजनों में बदल गई।
दुनिया भर में पहचान मिली बटर गार्लिक नान को
बटर गार्लिक नान को भी दुनिया भर में पहचान मिली है।यह इंटरनेशनल ब्रेड रैंकिंग में भी सबसे ऊपर है।इसी के साथ मसाला डोसा ने भी अपने कुरकुरेपन और अनोखे स्वाद से इंटरनेशनल लोगों को प्रभावित किया है। नान का इतिहास बेहद समृद्ध है। नान को अक्सर मुगलई व्यंजनों से जोड़ा जाता है, लेकिन इसका इतिहास उससे भी पुराना है। माना जाता है कि नान की उत्पत्ति फारस में हुई थी और 16वीं शताब्दी में मुगल सम्राटों के साथ भारत आई। यह जल्द ही शाही रसोई में एक मुख्य व्यंजन बन गई, खासकर उत्तर भारत में, जहां इसे तंदूर में पकाया जाता। शुरू में यह समाज के उच्च वर्ग का व्यंजन थी, मगर धीरे-धीरे सभी वर्गों में फैल गई। इतिहास में कुलचा और नान को अक्सर सूखे मेवे या मांस से भरकर तैयार किया जाता था- यह परंपरा फारसी बेकर्स से आई थी।
पंकज शर्मा

