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फिर लौटा पुराने जमाने के बर्तनों का दौर, स्वाद के साथ सेहत को तरजीह दे रहे लोग

आधुनिक होने के साथ-साथ हम पुराने ज़माने में लौट रहे हैं

फिर लौटा पुराने जमाने के बर्तनों का दौर, स्वाद के साथ सेहत को तरजीह दे रहे लोग

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एक दौर था जब लोग मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाते थे, उसके बात धातुओं के बर्तनों का चलन बड़ा और फिर नॉनस्टिक और कई आकर्षक रंगों के बर्तन भी बाजार में बिकने लगे। पहले के समय में भारी पत्थर की चक्की ज़्यादातर घरों में मिल जाती थी जिसमें हर तरह का अनाज बारीक पिस जाता था। अब ये केवल गांवों में मिल सकती है। कोरोना के इस दौर में लोग आधुनिक बर्तन होने के बावजूद हम पुराने समय में इस्तेमाल होने वाले धातुओं के बर्तनों की तरफ़ लौट रहे हैं। स्वाद और पर्यावरण के प्रति जागरूकता के लिए भोजन पकाने के पुराने तरीकों और धातुओं के बर्तनों को अपनाया जा रहा है। आधुनिक होने के साथ-साथ हम पुराने ज़माने में लौट रहे हैं।

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मिट्टी के बर्तन: पहले के समय में भोजन पकाने और भोजन रखने के लिए मिट्टी के बर्तनों का उपयोग होता था। हालांकि, यह तो सदा से बनते रहे थे, लेकिन इनकी लोकप्रियता घट गई थी।अब मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल फिर से शुरू हुआ है। इनमें भोजन स्वादिष्ट बनने के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक होता है और मिट्‌टी का सौंधापन भी स्वाद बढ़ा देता है। हालांकि कुछ लोग मिट्‌टी के बर्तन में ही दही जमाते आए हैं और गर्मी में मटके का पानी भी पीते हैं।अब मिट्‌टी के गिलास, जग, तवा, भगोना, कड़ाही, भोजन रखने के लिए बर्तन और पानी के लिए बोतलें भी उपयोग होने लगी हैं। टेराकोटा के बर्तनों का उपयोग भी बढ़ रहा है।

स्वास्थ्यवर्धक हैं लोहे के बर्तन: पहले लोहे का तवा हर घर में मिल जाता था, लेकिन नॉनस्टिक पैन आने के बाद इसका उपयोग कम हो गया। पर अब लोहे के तवे के साथ कड़ाही, पैन, भगोनों का उपयोग भी बढ़ गया है। इनके साथ लोहे का ढक्कन भी उपयोगी है। ढक्कन पर गर्म अंगारे रखकर भोजन को बेहतर तरीके से पकाया जा सकता है। कई यात्री इसी तरह लोहे के बर्तनों में भोजन पकाते हैं क्योंकि इसमें भोजन अच्छी तरह से पकता है और अंगारों पर बर्तन जलते नहीं हैं। लोहे का एक फ़ायदा यह भी है कि नॉन स्टिक पैन की तरह इसकी काली परत सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाती।

लकड़ी और बांस के बर्तन: रसोई में लकड़ी से बना चकला-बेलन, चॉपिंग बोर्ड, स्पैचुला (चमचा), स्टीमर का इस्तेमाल हमेशा से होता आया है। अब आटा गूंधने के लिए लकड़ी का बोल है, चाय और पानी के लिए कप और गिलास भी है। भोजन को ढकने के लिए और परोसने के लिए भी लकड़ी के ढक्कन और प्लेट कटोरी इस्तेमाल होने लगी हैं।सामान्यत बांस और नारियल से बने बर्तन उपयोग में लिए जाते हैं, लेकिन इनके अलावा वॉलनट, चेरी आदि के भी बर्तन हैं। वहीं हल्के कामों के लिए अखरोट के पेड़ के पत्तों से तैयार की गईं प्लेट्स और कटोरी भी प्रयुक्त होने लगी हैं।

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