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राज्यपाल आर्लेकर ने स्कूल में छात्रों से किया संवाद, बोले- पुस्तकें हमारी दोस्त, चिंतक और मार्ग-दर्शक

41 विद्यार्थियों को भेंट की महापुरूषों की पुस्तकें 15 दिन में पत्र लिख प्रतिक्रिया बताने को कहा

राज्यपाल आर्लेकर ने स्कूल में छात्रों से किया संवाद, बोले- पुस्तकें हमारी दोस्त, चिंतक और मार्ग-दर्शक

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शिमला। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर (Governor Rajendra Vishwanath Arlekar ) शुक्रवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बल्देयां में पहुंचे। यहां उन्होंने छात्रों से बात की। शिमला के निकट मशोबरा में स्थित इस स्कूल की नौंवी कक्षा के छात्रों से राज्यपाल ने संवाद किया। इस दौरान राज्यपाल आर्लेकर ने कक्षा (Class) के सभी 41 विद्यार्थियों को महापुरूषों की पुस्तकें (Books) भेंट की और साथ ही छात्रों से आश्वासन लिया कि वह इन पुस्तकों को पढ़ेंगे और पढ़ने के बाद अपनी प्रतिक्रिया के रूप में उन्हें 15 दिनों में पत्र लिखेंगे। राज्यपाल ने प्रदेश में नई पहल की है। वह किसी भी सरकारी स्कूल में जाकर विद्यार्थियों (Students) से बातचीत करते हैं और उन्हें पुस्तकें भेंट कर पढ़ने की आदत को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। गत दिनों उन्होंने सोलन के राजकीय दलीप वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल का दौरा किया था और वहां भी नौंवी कक्षा के विद्यार्थियों से संवाद किया था।

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श्री आर्लेकर शुक्रवार सुबह 11 बजे के करीब स्कूल पहुंचे। उन्होंने केवल कक्षा अध्यापक की उपस्थिति में विद्यार्थियों से बातचीत की। उन्होंने बच्चों से सामान्य प्रश्न किए जो उनकी पढ़ाई की आदत से जुड़े थे। 41 विद्यार्थियों की कक्षा में दो-तीन बच्चों को छोड़कर पाठ्य पुस्तकों के अलावा अन्य पुस्तकें पढ़ने का शौक उनमें ना होने पर राज्यपाल ने चिंता जाहिर की। देश की आजादी और स्वतंत्रता आंदोलन के हमारे नायकों के नाम तो विद्यार्थी जानते थे लेकिन उनकी जीवनी किसी ने नहीं पढ़ी। राज्यपाल ने कहा कि पुस्तकें हमारी दोस्त, चिंतक और मार्ग-दर्शक होती हैं। घर पर अच्छी पुस्तकें रहेंगी तो पढ़ने की आदत बनेगी। उन्होंने कहा कि अक्सर अभिभावक कहते हैं कि उनके बच्चे मोबाइल व टेलीविजन देखते हैंए लेकिन कितने अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए अच्छी पुस्तकें लाते हैं। पुस्तकों का चयन भी अभिभावकों को ही करना है। उन्होंने कहा कि समाज की अधिकांश समस्याएं पढ़ाई की आदत ना होने से है।

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