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हिमाचल हाईकोर्ट: 5 किलो चरस रखने के दो आरोपियों की सजा बरकरार
शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट (Himachal High Court) ने 5 किलोग्राम चरस (Charas) रखने के दो आरोपियों को निचली अदालत (Lower Court) द्वारा सुनाई गई सजा पर अपनी मुहर लगा दी है। सिरमौर निवासी अनिल कुमार और रमेश चंद को निचली अदालत ने सात-सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। निचली अदालत ने दोनों को 50-50 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने इनकी अपीलों को खारिज करते हुए निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराया है।
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23 मई 2013 को पांवटा पुलिस ने राजवन के पास नाका लगाया था। दोनों दोषी बदरीपुर की तरफ से स्कूटर पर आ रहे थे। चेकिंग करने पर पुलिस ने उसके थैले से 5 किलोग्राम चरस बरामद की। पुलिस ने मामले की प्रारंभिक जांच कर पुलिस थाना पांवटा साहिब में मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम की धारा 15 के तहत प्राथमिकी दर्ज की। मामले की जांच के बाद अभियोजन पक्ष ने दोषियों के खिलाफ निचली अदालत में अभियोग चलाया। निचली अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष दोषियों के खिलाफ अभियोग साबित करने में सफल रहा है। इस निर्णय को दोषियों ने हाईकोर्ट के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी थी।
फर्जी डिग्री मामले की जांच कर रही कमेटी ने हिमाचल हाईकोर्ट में सौंपी रिपोर्ट
शिमला। मानव भारती विश्वविद्यालय (Manav Bharti University) में फर्जी डिग्री मामले (Fake Degree Case) की जांच कर रही कमेटी ने हाईकार्ट में अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अदालत को बताया गया कि अभी तक की जांच में 1775 डिग्रियां सही पाई गई है। सत्र 2016-17 में जारी की गई डिग्रियों की जांच चल रही है, जिसे जल्दी ही पूरा कर लिया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने कमेटी को ताजा स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए हैं। मामले की सुनवाई चार हफ्ते के बाद निर्धारित की गई है।
विश्वविद्यालय पर फर्जी डिग्री बांटने का आरोप हैं। हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान विनियामक की ओर से विश्वविद्यालय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। विशेष जांच टीम इस मामले की जांच कर रही है। विश्वविद्यालय के सारे दस्तावेज विशेष जांच टीम के पास है। ऐसी स्थिति में छात्रों को प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहे हैं। छात्रों की मुश्किलों को देखते हुए हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान विनियामक ने राज्य सरकार से इन दस्तावेजों की प्रतिलिपियों की मांग की थी। राज्य सरकार ने दस्तावेजों के सत्यापन के लिए कमेटी का गठन किया है।
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