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हिमाचल हाईकोर्ट ने HPSSC को भर्तियों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से दिए ये आदेश

कहा- अस्थाई आंसर की के खिलाफ मिली अपत्तियों को निर्धारित समय में वेबसाइट पर डालें

हिमाचल हाईकोर्ट ने HPSSC को भर्तियों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से दिए ये आदेश

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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट (Himachal High Court) ने हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग (HPSSC) को भर्तियों में और अधिक पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से आदेश दिए कि वह अस्थाई आंसर की के खिलाफ मिली अपत्तियों को निर्धारित समय के भीतर अपनी वेबसाइट (Website) पर डालें। कोर्ट ने ऐसा करते समय विवादित प्रश्नों का क्रमांक नम्बर, विवादित उत्तर इत्यादि और आपत्तियों का सार वेब साइट पर डालने को कहा गया है। इसके पश्चात सभी अभ्यर्थी जो उन आपत्तियों के संदर्भ में अपना जवाब देना चाहें तो उन्हें भी अपने जवाब देने के लिए निर्धारित समय के भीतर इसकी इजाजत दी जाए। फिर सारे मामले पर पूरी छानबीन कर एक निर्धारित समय में आपत्तियों और जवाब पर निर्णय ले और वेबसाइट पर अपने निष्कर्ष को डालें। इसके पश्चात ही वेबसाइट पर अंतिम आंसर की प्रकाशित करने के आदेश दिए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश ए ए सैयद व न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने आयोग पर एकल पीठ द्वारा डाले गए 25 हजार के जुर्माने को माफ करते हुए यह आदेश जारी किए।

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हाईकोर्ट: 2003 के बाद नियमित होने वाले कर्मचारी को जीपीएफ नंबर देने के आदेश

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वर्कचार्ज सेवा अवधि को जीपीएफ नंबर (GPF Number) देने व पेंशन के लिए आंकने के आदेश जारी किए। न्यायाधीश सत्येन वैद्य की एकल पीठ ने मितर देव को तीन महीनों के भीतर जीपीएफ नंबर दिए जाने के आदेश (Order) जारी किए है।याचिकाकर्ता वर्ष 1991 में दैनिक वेतन भोगी के तौर पर वन विभाग करसोग के तैनात हुआ था। पहली जनवरी 2002 से उसे वर्क चार्ज प्रदान किया गया। उसकी सेवाएं वर्ष 2006 से नियमित की गई। वर्ष 2006 में राज्य सरकार ने नियमों में संशोधन किया था कि जिन कर्मचारियों की सेवाएं 15 मई, 2003 के बाद नियमित की गई है, वे पुरानी पेंशन के हकदार नहीं है। उन्हें अंशदायी पेंशन योजना के तहत पेंशन का लाभ दिया जाएगा।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जब उसे पहली जनवरी 2002 से उसे वर्क चार्ज प्रदान किया गया तो उस स्थिति में वर्ष 2002 से उसके नियमितीकरण की अवधि पेंशन के लिए गिनी जानी चाहिए। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता को पेंशन (Pension) का लाभ न दिया जाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का सरासर उल्लंघन है। अदालत ने शीर्ष अदालत के निर्णय का हवाला देते हुए अपने निर्णय में कहा कि वर्कचार्ज से नियमितीकरण की अवधि पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ के लिए गिनी जाएगी। अदालत ने कहा कि जब वर्कचार्ज की अवधि पेंशन के लाभ दिए जाने के लिए गिना जाएगा तो स्वाभाविक है कि उसकी सेवाएं पेंशन नियम से शासित होगी।अदालत ने याचिकाकर्ता को अंशदायी पेंशन योजना के अंतर्गत लाने वाले विभाग के आदेश को खारिज करते हुए यह निर्णय सुनाया।

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