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हिमाचल: जलशक्ति आउटसोर्स कर्मचारियों को नहीं मिल रहा पूरा वेतन, आवाज उठाने पर ठेकेदार दे रहे धमकी

आउटसोर्स कर्मचारियों को 10 महीने बाद दिया जा रहा सिर्फ चार महीने का वेतन

हिमाचल: जलशक्ति आउटसोर्स कर्मचारियों को नहीं मिल रहा पूरा वेतन, आवाज उठाने पर ठेकेदार दे रहे धमकी

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हमीरपुर। जल शक्ति विभाग की पेयजल योजनाओं को संचालित कर रहे ठेकेदार के माध्यम से रखें आउटसोर्स कर्मचारियों को 10 महीने बाद सिर्फ चार महीने का वेतन दिया जा रहा है। इसी के चलते सोमवार को हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड इंप्लाइज यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा की अगुवाई में आईपीएच आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल डीसी हमीरपुर ज्ञापन सौंपकर समस्या के स्थाई समाधान की मांग की। वहीं, मामला प्रशासन के ध्यान में लाने के बाद ठेकेदारों द्वारा इन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है।

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इससे पहले भी जल शक्ति विभाग नादौन व धनेटा के तहत आउटसोर्स कर्मचारी मांगों को लेकर डीसी हमीरपुर को ज्ञापन सौंपा था। जिसके बाद इन्हें कुछ महीने का वेतन दिया गया, लेकिन अभी भी कई महीनों के वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड इंप्लाइज यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि 80 से ज्यादा कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए कि विभाग द्वारा ठेकेदार प्रति कर्मचारी कितने रुपये का भुगतान किया जाता है, जबकि कर्मियों को सिर्फ पांच से छह हजार मासिक वेतन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब जल शक्ति विभाग के अधिकारियों से इस संदर्भ में बात की जाती है तो उनका यही तर्क होता है कि यह कर्मचारी ठेकेदार के माध्यम से रखे गए हैं। हालांकि पॉलिसी में यह नियम है कि यदि आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण हो रहा तो विभाग इसकी जांच कर सकता है।

हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड इंप्लाइज यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि सरकार को आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनानी चाहिए। सरकार को इनके लिए वेतन विसंगति को दूर करने का भी प्रावधान करना चाहिए ताकि इन्हें अपने परिवार का भरण पोषण करने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा ठेकेदार के माध्यम से दिया जाने वाला वेतन इनके अकाउंट में नहीं डाला जाता बल्कि कैश दिया जाता है। वेतन की अदायगी सीधे अकाउंट में होनी चाहिए। इससे जहां वेतन प्राप्त करने वालों के पास वेतन अदायगी का प्रूफ होगा वहीं ठेकेदार के पास भी अदायगी का रिकॉर्ड रहेगा।

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