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संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है जीवित्पुत्रिका व्रत

जीवित्पुत्रिका व्रत 28 सितंबर को नहाए खाए के साथ शुरू होगा

संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है जीवित्पुत्रिका व्रत

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हिदू पंचांग के अनुसार, हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाता है। इसे जितिया व्रत भी कहा जाता है। इस व्रत को माताएं संतान प्राप्ति और उनकी लंबी आयु की कामना के लिए रखती हैं। यह व्रत पूरे दिन दिन तक चलता है। इसे सभी व्रतों में कठिन माना जाता है। माताएं अपने संतान की खुशहाली के लिए जितिया व्रत निराहार और निर्जला रखती हैं।  माना जाता है कि जो महिला अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं उसकी संतान को कभी भी दुख नहीं उठाना पड़ता है और उनके घर में सुख- समृद्धि बनी रहती है.। जीवित्पुत्रिका व्रत 28 सितंबर को नहाए खाए के साथ शुरू होगा। 29 सितंबर को पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाएगा। 30 सितंबर को व्रत का पारण किया जाएगा।

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महाभारत काल से है संबंधः  जीवित्पुत्रिका व्रत का संबंध महाभारत काल से है।  दरअसल महाभारत के युद्ध में अश्वत्थामा अपने पिता की मौत से बहुत क्रोधित थे और हर हाल में पांडवों से बदला लेना चाहते थे।  इसलिए वह पांडवों के शिविर में घुस गए और उसमें सो रहे पांच लोगों को पांडव समझकर मार डाला।  वे सभी द्रपदी की संताने थे।  अर्जुन ने अश्वत्थामा की मणि छीन लिया और क्रोध में आकर अश्वत्थामा ने अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे को मार डाला।  श्री कृष्ण ने अपने सभी पुण्यों का फल उत्तरा की अजन्मी संतान को देकर उसके गर्भ में पल रहे बच्चें को पुन जीवित कर दिया।  भगवान कृष्ण की कृपा से जीवित होने वाले इस बच्चे को जीवित्पुत्रिका नाम दिया गया।  इसक बाद से संतान की लंबी उम्र के लिए हर साल जितिया का व्रत रखा जाता है।

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