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तीरंदाजी में जीत चुकी Gold Medal, आज खेल छोड़ पकौड़े बेचने को मजबूर ममता
प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती ये तो आपने सुना होगा, लेकिन कई बार हालात के आगे लोग मजबूर हो जाते हैं। हमारे देश में ऐसे कई लोग हैं जो बहुत कुछ करने का दम रखते हैं लेकिन उनके हालात और परिस्थितियां (Circumstances) उनको आगे बढ़ने से रोकती हैं। कई बार हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि इंसान को अपना पैशन और सपना छोड़कर रोजी-रोटी कमाने के लिए ऐसा काम करना पड़ता है जो वो सपने में भी करने की नहीं सोच सकता। गरीबी और तंगहाली के चलते कई एथलीट और स्पोर्ट्सपर्सन भी खेल छोड़कर जीविका के दूसरे साधन तलाशने में जुट जाते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ तीरंदाजी में गोल्ड मेडल (Gold Medal in Archery) हासिल कर चुकी ममता के साथ।
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धनबाद (Dhanbad) के तेलीपाड़ा इलाके की रहने वाली 13 साल की ममता अंडर-13 तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं लेकिन इन दिनों उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और वह परिवार को सपोर्ट करने के लिए झालमुड़ी और पकौड़े बेच रही है। ममता पिछले साल वह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर आर्चरी में ट्रेनिंग ले रही थी तभी लॉकडाउन लग गया। लॉकडाउन में लौटने के बाद वह दोबारा वापस नहीं जा सकीं।
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ममता का कहना है, मैं अंडर-13 में गोल्ड जीत चुकी हूं। नेशनल चैंपियनशिप में फर्स्ट आई हूं, साथ ही कई और खेलों में हिस्सा ले चुकी हूं। विपरीत हालातों में किसी ने मदद नहीं की तो खेल रुक गया। घर की हालत लगातार बिगड़ रही है ऐसे में वो दुकान पर पकौड़े बेचने लगी।’ ममता ने बताया कि वह रोजाना 100-200 रुपए की कमाई ही कर पाती हैं। इससे उनका घर किसी तरह चलता है।
