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हिमकेयर योजना में बड़ा बदलाव: अब ‘वास्तविक खर्च’ या ‘पैकेज रेट’ में से जो कम होगा, वही मिलेगा
Himcare Scheme: हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पतालों, मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में हिमकेयर (Himcare) योजना के तहत मिलने वाली इलाज प्रतिपूर्ति (reimbursement) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, अब सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को इलाज के क्लेम का भुगतान वास्तविक खर्च और निर्धारित पैकेज रेट में से जो भी कम होगा, उसी के आधार पर किया जाएगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
कैशलेस इलाज रहेगा जारी
अधिसूचना के मुताबिक, मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पहले की तरह ही हिमकेयर योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती रहेगी। अस्पताल और मेडिकल कॉलेज हिमकेयर के तहत इलाज के बिलों में वास्तविक खर्च के साथ-साथ ‘हिमकेयर साथी’ का निर्धारित पारिश्रमिक भी क्लेम कर सकेंगे।
मुफ्त या बजट से मिली दवाइयों का नहीं मिलेगा अलग क्लेम
सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जो दवाइयां, कंज्यूमेबल, सर्जिकल आइटम या अन्य सामान पहले से सरकारी सप्लाई में उपलब्ध हैं—या जिन्हें राज्य सरकार अथवा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के बजट से अलग से उपलब्ध कराया गया है—अस्पताल उनका भुगतान हिमकेयर के तहत अलग से क्लेम नहीं कर पाएंगे।यह नया आदेश 8 अप्रैल 2026 को जारी पुरानी अधिसूचना के स्थान पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू किया गया है। इसकी प्रतियां महालेखाकार, हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक, डेंटल हेल्थ सर्विसेज निदेशक और NHM मिशन निदेशक को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेज दी गई हैं।
क्या बदला है इस नए आदेश से?
पुराना नियम: पहले सरकारी अस्पताल में मरीज के इलाज पर आई दवाइयों और सामान के कुल ‘वास्तविक खर्च’ को हिमकेयर के तहत पूरा क्लेम किया जा सकता था।
नया नियम (कम राशि का फॉर्मूला): अब अस्पताल को ‘वास्तविक खर्च’ या ‘पैकेज रेट’ में से केवल वही राशि मिलेगी जो कम होगी। यदि किसी इलाज का निर्धारित पैकेज रेट ₹50,000 है और अस्पताल का वास्तविक खर्च ₹40,000 आया है, तो अस्पताल को केवल ₹40,000 ही मिलेंगे। यदि पैकेज रेट ₹50,000 है और वास्तविक खर्च ₹60,000 आता है, तब भी अस्पताल अधिकतम ₹50,000 का ही क्लेम कर सकेगा।
अनु गुप्ता
