-
Advertisement
हिमाचल लॉटरी विवाद: सरकार का राजस्व पर जोर, बीजेपी को सता रही युवाओं की चिंता
Himachal Lottery Controversy: हिमाचल प्रदेश में दिवाली से राज्य लॉटरी दोबारा शुरू करने के कांग्रेस सरकार के फैसले को लेकर राज्य का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है। 26 साल बाद लॉटरी व्यवस्था की वापसी को लेकर जहां मुख्य विपक्षी दल बीजेपी सुक्खू सरकार पर हमलावर है, वहीं सरकार ने इसे राजस्व वृद्धि और सट्टेबाजी रोकने के लिए उठाया गया नियंत्रित कदम करार दिया है।
विपक्ष का हमला: ‘निजी फायदे के लिए युवाओं का भविष्य दांव पर
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार के फैसले पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लॉटरी की आड़ में सरकार प्रदेश के युवाओं को बर्बादी की तरफ धकेल रही है। जयराम ठाकुर ने कहा कि पहले भी लॉटरी के कारण हिमाचल के कई परिवार तबाह हुए थे और लोगों को अपनी जमीनें तक बेचनी पड़ी थीं। इसी सामाजिक नुकसान को देखते हुए भाजपा सरकार के समय इसे बंद किया गया था। उन्होंने लॉटरी की तुलना ‘चिट्ठे’ के नशे से करते हुए कहा कि एक बार इसकी लत लग जाए तो व्यक्ति के बर्बाद होने तक यह छूटती नहीं। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार प्रदेश की माली हालत सुधारने का महज हवाला दे रही है, जबकि वास्तव में अपने निजी फायदे और चहेती कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की और इस फैसले को तुरंत वापस लेने को कहा।
सरकार का पक्ष: ‘₹100 करोड़ का राजस्व और सट्टेबाजी पर लगाम’
दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए सरकार का रुख स्पष्ट किया। चौहान ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में अवैध सिंगल डिजिट या सिंगल लाइन लॉटरी शुरू नहीं की जाएगी, जिससे आम जनता सट्टेबाजी की लत से बची रहे। सरकार का उद्देश्य वैध और पारदर्शी लॉटरी के जरिए आम लोगों को गैर-कानूनी जुए और सट्टेबाजी से दूर रखना है। इसके लिए सख्त स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर ली गई है। पंजाब और केरल की तर्ज पर नियंत्रित लॉटरी चलाकर सरकार ने सालाना करीब 100 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का खाका तैयार किया है। कानूनी व वित्तीय पहलुओं के अध्ययन के बाद फाइल को अंतिम मंजूरी के लिए वित्त विभाग भेजा गया है। वित्त विभाग की अंतिम हरी झंडी के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस योजना को किस प्रशासनिक ढाँचे के साथ धरातल पर उतारती है और क्या विपक्ष के भारी विरोध के बीच यह फैसला अमल में आ पाता है या नहीं।
संजू चौधरी
हिमाचल अभी अभी की सभी खबरों के पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
