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Breaking : उहल विद्युत प्रोजेक्ट के Power House में फटा पैन स्टॉक, 30 कर्मचारी फंसे- सुबह किए Rescue

Breaking : उहल विद्युत प्रोजेक्ट के Power House में फटा पैन स्टॉक, 30 कर्मचारी फंसे- सुबह किए Rescue

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लडभड़ोल/मंडी। तहसील लडभड़ोल के पंचायत तुलाह में उहल तृतीय पन विद्युत प्रोजेक्ट चुल्ला के पावर हाउस (Power house) में उत्पादन शुरू करने के पहले दिन आधी रात को बड़ा हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार रात करीब साढ़े 11 बजे यहां उत्पादन शुरू हुआ था। इस दौरान एक पैन स्टॉक फट गया जिससे पावर हाउस को भारी नुकसान पहुंचा है। पावर हाउस में पानी भर जाने से 30 कर्मचारी अंदर फंस गए थे, जिन्हें कड़ी मशक्कत के बाद सुबह के समय रेस्क्यू (Rescue) कर लिया गया है। परियोजना में उत्पादन शुरू करने के पहले ही दिन हुए इस हादसे में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।

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पानी व मिट्टी भरने से पावर हाउस की मशीनरी खराब

आठ मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू कर सप्लाई हमीरपुर (Hamirpur) के मट्टन सिद्ध ग्रिड को भेजी जा रही थी। करीब एक घंटे बाद साढ़े 12 बजे इंजीनियरों ने लोड 8 से बढ़ाकर 16 मेगावाट करने के लिए प्रेशर बढ़ाया तो पावर हाउस से 150 मीटर की दूरी पर पैन स्टॉक में ब्लास्ट हो गया। पानी पावर हाउस की दीवार को तोड़कर अंदर घुस गया। 15 इंजीनियर व कर्मचारियों ने भाग कर जान बचाई व 15 लोग अंदर फंस गए। पावर हाउस पूरी तरह पानी व मिट्टी से भर गया। एक इंजीनियर (Engineer) ने हिम्मत दिखाकर पैन स्टॉक का वाल्ब बंद किया। इसके बाद कड़ी मशक्कत से अंदर फंसे कर्मचारियों को बाहर निकाला गया। पानी व मिट्टी भरने से पावर हाउस में करोड़ों रुपये की मशीनरी खराब हो गई है। 8.4 किलोमीटर लंबी पैन स्टॉक में चुल्ला स्थित पावर हाउस के नजदीक हादसा हुआ। चूल्हा प्रोजेक्ट के एमडी दिनेश चौधरी ने हादसे की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आज उच्चाधिकारियों की टीम मौके पर आकर नुकसान का आंकलन करेगी। प्रारम्भिक दृष्टि में करोड़ों का नुकसान आंका जा रहा है।

 

परियोजना के निर्माण पर खर्च हो चुका 1645 करोड़ से ज्यादा

100 मेगावाट क्षमता के इस प्रोजेक्ट में 33.3 मेगावाट की तीन टरबाइन लगाई गई हैं। टरबाइन एक से बिजली उत्पादन शुरू किया गया था, इंजीनियरों की योजना बिजली उत्पादन को 32 मेगावाट तक ले जाने की थी। मौजूदा समय में एक मेगावाट क्षमता के बिजली प्रोजेक्ट के निर्माण पर 10 करोड़ रुपये खर्च आता है। इसमें भूमि अधिग्रहण, निर्माण कार्य व उपकरण शामिल रहते हैं। उस हिसाब से 100 मेगावाट प्रोजेक्ट पर 1000 करोड़ खर्च होने चाहिए थे। 13 साल पहले एक मेगावाट पर 4 करोड़ खर्च आता था, लेकिन इस परियोजना के निर्माण पर 1645 करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुका है।

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