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कसोल रेव पार्टी मामला: सुप्रीम कोर्ट से अफसरों को बड़ी अंतरिम राहत, हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
Kasol Rave Party Case: कुल्लू जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कसोल (पार्वती घाटी) में कथित अवैध रेव पार्टियों और नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से जुड़े मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार और कुल्लू के तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय से एक महत्वपूर्ण अंतरिम राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत कुल्लू के तत्कालीन उपायुक्त (DC), पुलिस अधीक्षक (SP) और संबंधित उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने, विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश जारी किए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट का रुख: अगली सुनवाई तक निर्देशों पर कोई कार्रवाई नहीं
सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक इस याचिका पर अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक हाईकोर्ट के विवादित निर्देशों पर अमल नहीं किया जाएगा। अदालत ने इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी कर अपना-अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला राज्य सरकार और प्रभावित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका पर आया है।
हाईकोर्ट ने क्या दिए थे निर्देश?
इससे पहले, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कुल्लू की पार्वती घाटी में अवैध रेव पार्टियों का आयोजन,नशीले पदार्थों (ड्रग्स) का धड़ल्ले से सेवन, और प्रशासनिक स्तर पर बरती गई कथित लापरवाही पर कड़ा संज्ञान लिया था। हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि जिला प्रशासन क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल रहा है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि तत्कालीन डीसी, एसपी और एसडीएम का तुरंत तबादला किया जाए। तीनों अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।डीआईजी (DIG) स्तर के अधिकारी की निगरानी में निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित हो।अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए।
सुप्रीम कोर्ट पहुंची राज्य सरकार, मिली राहत
हाईकोर्ट के इन कड़े निर्देशों के खिलाफ हिमाचल सरकार और संबंधित अधिकारियों ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। याचिका में तर्क दिया गया कि हाईकोर्ट के आदेशों के विभिन्न पहलुओं पर गंभीर कानूनी समीक्षा की आवश्यकता है।प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश के निष्पादन पर रोक लगा दी।”सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद अब जब तक अंतिम फैसला या अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की पुलिस FIR या अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रभावी नहीं होगी। यह प्रशासनिक हलकों के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है।
पंकज शर्मा

