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Video: घर के आंगन में Mini Bus Stand,बसों के साथ खड़े रहते हैं ट्राला, टैंकर, टिप्पर

Video: घर के आंगन में Mini Bus Stand,बसों के साथ खड़े रहते हैं ट्राला, टैंकर, टिप्पर

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हमीरपुर। लॉकडाउन (Lockdown)के दौरान एक युवक ने अपने अंदर छिपी प्रतिभा को समय देकर लोगों के सामने एक अनूठी मिसाल को कायम की ही साथ में आत्मनिर्भर भारत के नारे को भी साकार किया। नौकरी गई तो कोई बात नहीं लेकिन हाथ का हुनर काम आया और इसी में रोजगार का रास्ता निकाला।

इस युवक के तैयार किए गए खिलौनों को देखकर हर कोई दंग रह जाता है क्योंकि इन्हें देखकर ऐसा लगता है कि मानो यह असली वाहन है। हमीरपुर जिला के ग्राम पंचायत ग्वारडू के गांव कुसवाड़ (Hamirpur distt in Himachal Pradesh) का युवा पंकज कुमार के हाथों में ऐसी कला है कि कागज, लकड़ी के साथ बनाए गए वाहनों को देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता है कि यह असली है या नकली। पंकज कुमार ने अपने घर के आंगन में ही मिनी बस अड्डा (Mini Bus Stand) बनाकर एचआरटीसी की बसों को स्थान दिया है तो ट्राला, टैंकर, टिप्पर, ट्रैक्टर, घर, मंदिर भी बनाए हुए है।

बचपन से ड्राईंग का रहा है शौक

पंकज कुमार (Pankaj Kumar) की माने तो बचपन से ड्राईंग का काफी शौक रहा है और जब भी समय लगता था तो ड्राइंग पर हाथ आजमा लेते थे और इस समय पंकज बद्दी में निजी कंपनी में नौकरी कर रहे थे, लेकिन लॉकडाउन के कारण घर आना पड़ा था, जिसके चलते घर में बेकार बैठने के बजाय पंकज ने बसें, ट्राला, टैंकर, टिप्पर, ट्रैक्टर, घर, मंदिर बनाना शुरू कर दिया। पंकज की कलाकारी को देखकर हर कोई हैरान रह जाता है क्योंकि पंकज के हाथों से तैयार की गई गाड़ियों में असली गाड़ियों की झलक दिखती है। पंकज ने बताया कि खिलौना गाड़ियों को बनाने में दो से तीन दिन लग जाते है और गाड़ियों में असली गाड़ियों की तरह आटोमैटिक लाइटें लगाई गई तो खिड़की से लेकर दरवाजे भी हूबहू असली गाड़ियों की तरह लगाई गई हैं।


गाड़ियां खरीदने के लिए फोन भी आए

पंकज ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान घर में बैठे बैठे बोर हो रहे थे तो मन में विचार आया कि गाड़ियों को तैयार किया जाए और इसी शौक के चलते एक दर्जन गाड़ियां बनाई। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से इन गाड़ियों की मार्किटिंग की गई, जिस कारण लोगों के गाड़ियां खरीदने के लिए फोन भी आए है। पंकज की माता मीना देवी ने अपने बेटे के काम पर खुशी जाहिर की और कहा कि पहले तो खिलौने बनाना ठीक नहीं लगता था लेकिन जब खिलौने बनाने के बाद लोगों की डिमांड आने लगी तो लगा कि अच्छा काम किया है। पंकज के भाई गौरव कुमार ने बताया कि वे भाई की कला देख कर बहुत खुश है और जैसे पीएम नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि आत्मनिर्भर बनने के लिए कुछ करना चाहिए तो ऐसा ही हमारे भाई ने किया है।

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